कार्पोरेट घरानों के हित में काम कर रही मोदी सरकार : अखिलेन्द्र प्रताप सिंह

मुगलसराय। चन्दौली ,सोनभद्र, मिर्जापुर के अगुआ साथियों के संयुक्त बैठक मुगलसराय कार्यालय में सम्पन्न हुआ बैठक में स्वराज्य अभियान के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने संबोधित किया उन्होने कहा कि कार्पोरेट घरानों की लगभग दस लाख करोड़ रूपए से अधिक बैकों से लूटी गयी परिसम्पत्तियों को माफ किया जाता है उनसे बैकों से लिए गए कर्जों की वसूली नहीं की जाती दूसरी तरफ लाखों किसानों के द्वारा जारी आत्महत्या के दौर के बावजूद उनके कर्जे माफ नहीं किए जाते।

विदेशी पूंजी के दबाब में बाहर के मालों के ऊपर जो भी मात्रात्मक प्रतिबंध लगे रहते थे उनको भी धड़ल्ले से हटा दिया गया, सभी क्षेत्रों में सौ फीसदी विदेशी पूंजी के निवेश के लिए दरवाजे खोल दिए गए हैं और उन्हें मनमाने ढ़ग से लूट की छूट मिली हुई है। सब मिलाजुला कर खेती किसानी, छोट-मझोले उद्योग, व्यापार और मध्यवर्गीय जीवन पूरी तौर पर तबाह हो रहा है। पूरा अनौपचारिक क्षेत्र गहरे संकट के दौर से गुजर रहा है। जीवन की जो आर्थिक सच्चाई है वह मोदी सरकार से लोगों को मोहभंग की स्थिति में ले जा रही है।

वित्तीय पूंजी और लूट से उत्पन्न संकट से ध्यान हटाने के लिए जनता के सभी तबकों और हिस्सों में गैर जरूरी और साम्प्रदायिक मुद्दों पर तनाव बनाया जा रहा है और जनता के सभी तबकों को बराबर आपसी संघर्ष और तनाव की स्थिति में रखा जा रहा।

राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में सोनभद्र, चंदौली और मिर्जापुर में राजनीतिक कार्यस्थली के बतौर जारी कार्यभार को आगे बढ़ाते हुए मुद्दों को और ठोस करने तथा जन हस्तक्षेप को बढ़ाने के लिए जोर देने की बात बैठक में तय हुई। मजदूर किसान मंच घटक जय किसान आंदोलन की सदस्यता बढ़ाने और उसके बैनर के नीचे वनाधिकार कानून, मनरेगा और ग्रामीण गरीबों और किसानों की कर्ज माफी, फसल खरीद की गारंटी और सहकारी बैकों से बिना ब्याज के ऋण देने के मुद्दों को और मजबूती से उठाने की बात हुई। ठेका मजदूर यूनियन को मजबूत करने और वहां के मजदूरों के विनियमितीकरण के लिए न्यायालय से हस्तक्षेप करने की नीति को जारी रखने का फैसला लिया गया। युवा मंच द्वारा शुरू किये गये काम को नौजवानों में आगे बढ़ाने व मजबूत करने का निर्णय लिया गया।

साथ ही इलाहाबाद में युवा मंच के द्वारा रोजगार के अधिकार और खाली सरकारी पदों की भर्ती के लिए चलाए जा रहे आंदोलन का स्वागत किया गया। बैठक में यह रिपोर्ट किया गया कि कोल और उन आदिवासी जातियों को जिन्हें अभी अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिला है के मुद्दे पर स्वराज अभियान द्वारा भेजे गए पत्र को निर्वाचन आयोग ने संज्ञान में लिया है और अग्रिम कार्यवाही के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को भेजा गया है। इस सम्बंध में भविष्य में न्यायालय से भी हस्तक्षेप की योजना बनायी गयी और मंत्रालय को पत्रक देने के लिए बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान चलाने का फैसला हुआ।

सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर में कार्यकर्ताओं को तैयार करने और उनमें नियमित रूप से अध्ययन चलाने की जिम्मेदारी का0 राजेश सचान को दी गयी। बैठक में यह भी महसूस किया गया कि जिस स्तर पर व्यवस्थागत सत्ता पक्ष का संकट उभर रहा है और फासीवाद का खतरा बढ़ता जा रहा है उस स्तर पर वामपंथ की पहलकदमी और प्रभाव नहीं बढ़ रहा है। इस राजनीतिक संकट से निपटने के लिए बहुवर्गीय जन राजनीतिक पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर खड़ा करने और सभी लोकतांत्रिक, प्रगतिशील, वामपंथी ताकतों के साथ एकताबद्ध होने की नीति पर अमल करने की जरूरत को और मजबूती से महसूस किया।

बैठक में कामकाज की समीक्षा हुई और कामकाज के विस्तार व सुदृढ़ीकरण के लिए कार्य योजना बनाई गयी। प्रख्यात माक्र्सवादी अर्थशास्त्री प्रो0 प्रभात पटनायक के लेख ‘नव उदारवाद पूंजीवाद का तर्क’ का सामूहिक अध्ययन करते हुए यह चिंहित किया गया कि यह दौर वित्तीय पूंजीवाद के प्रतिक्रियावाद का दौर है जिसमें सट्टेबाजी, शेयर, बैंक व बीमा, लाटरी के जरिये बड़े पैमाने पर पूंजी अर्जित की जा रही है और पूंजी का केन्द्रीकरण बढ़ता जा रहा है। भारत वर्ष में राजकोषीय घाटा न बढ़ने देने की नीति वित्तीय पूंजी के आतंक का एक हथियार है जिससे जनता के कल्याणकारी मदों के खर्च पर अंकुश लगाया जाता हैं वही कार्पोरेट घरानो से टैक्स वसूली व बैंक के लिएगये उनके कर्ज को वसूल कर राजकोषीय घाटे को समाप्त करने की कोशिश सरकारों में नहीं दिखता हैं।

बैठक में दिनकर कपूर, राजेश सचान, अजय राय, अखिलेश दूबे, रामनरान राम, रामेश्वर राम, राजेन्द्र, श्रीकान्त, राममुरत पासवान, सुरेश चन्द्र बिन्द, रामकुमार राय संतोष भारती, संतलाल, सहित कई लोग शामिल रहे!

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