DM के चहेते सुनील कुमार के कारण जिले में ODF अभियान पर खतरा, यह रहा कारण

DM के चहेते सुनील कुमार के कारण जिले में ODF अभियान पर खतरा, यह रहा कारण

चंदौली जिले के ग्राम प्रधान संघ के अध्यक्ष प्रभाष कुमार सिंह उर्फ अनुज सिंह ने चंदौली जिले के जिलाधिकारियों के चहेतों के खिलाफ मोर्चा खोला है और कहा है कि जिले के जिलाधिकारी और उनके चहेतों के मनमाने रवैए और प्रधानों पर दबाव डालकर काम कराने के कारण जिले में टकराव के हालत पैदा कर रहे हैं। अनुज सिंह ने चंदौली जिले के जिलाधिकारी के चहेते लोगों पर जिले में मनमानी करने पर चंदौली समाचार से फोन पर खास बातचीत की…

सवाल १ …क्यों जिले के हालात के लिए जिलाधिकारियों को दोष दे रहे हैं..?

चंदौली जिले के पुराने जिलाधिकारी कुमार प्रशांत चंदौली जिले में एक एनजीओ लेकर आए थे तो नए जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल स्वच्छता प्रेरक लेकर आ गए। इन दोनों अधिकारियों के मनमानी कार्यशैली के चलते जिले में ग्राम प्रधानों ने इनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पुराने जिलाधिकारी के करतूत और निर्देश से कई प्रधानों व सचिवों के खिलाफ कार्यवाही हुई और जेल भी जाना पड़ा। अब इस जिलाधिकारी के कार्यकाल में कई प्रधानों पर शिकंजा कसा जा रहा है और यह सब स्वच्छता प्रेरक के रूप में काम करने वाले सुनील कुमार के कारण हो रहा है।

 

सवाल २.. क्या करते रहे हैं स्वच्छता के प्रेरक के रूप में आए सुनील कुमार…?

अनुज कुमार सिंह का कहना है कि जिलाधिकारी के विशेष अनुरोध पर अमरोहा जनपद से बुलाए गए सुनील कुमार की वजह से ही जनपद को ओडीएफ बनाने के काम में खलल पड़ी है। गांव में इस तरह के हालात पैदा हुए हैं कि कोई ग्राम प्रधान व सचिव पर भरोसा ही नहीं कर रहा है। शौचालय हर हालत में बनवाने का दबाव है और जो परेशानी हो रही है उसे कोई सुन नहींं रहा है। वह जो कह रहे हैं उससे काम बनने की बजाय खराब हो रहा है।

सवाल ३ …. क्या परेशानी हो रही है सुनील कुमार के काम से…?

जिले के जिला अधिकारी चंदौली सुनील कुमार को बचाने के लिए उनकी दी गई रिपोर्ट पर काम कर रहे हैं । इसीलिए ग्राम प्रधानों और जिला प्रशासन में टकराव की नौबत आई है क्योंकि वह जिले के ग्राम प्रधानों व सचिवों के खिलाफ जिलाधिकारी को कार्रवाई करने के लिए कुछ रिपोर्ट देकर गए हैं।

सवाल ४… क्या चाहता है प्रधान संघ..?

  अनुज कुमार सिंह का कहना है कि जिलाधिकारी जिस तरह के कार्रवाई का आदेश दिए हैं उसी तरह से मुकदमा दर्ज कराने का फैसला वापस लें और सीधे ग्राम प्रधानों के साथ वार्ता करें तभी ओडीएफ के मिशन में सभी प्रधान सहयोग करेंगे।

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