चंदौली जिले में अगर बूथ लेवल के आंकड़ों को देखा जाय तो पता चलता है कि चुनाव जीतकर दोबारा संसद में पहुंचने वाले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डा. महेंद्रनाथ पांडेय को उनके गोद लिए आदर्श गांव जरखोर में ही सपा प्रत्याशी के मुकाबले हार का सामना करना पड़ा है, जबकि विधायकों के साथ साथ जिलाध्यक्ष के बूथ पर भी हार मिली है। वहीं सपा के उम्मीदवार को रामकिशुन के गांव में कम वोट मिले हैं।

जरखोर गांव को भाजपा के सांसद ने इस गांव के विकास के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाओं की सौगात दी थी, लेकिन यहां पर गांव के मतदाताओं की पहली पसंद सपा प्रत्याशी डॉ. संजय चौहान रहे। वहां दो बूथों पर संजय को 807 मत मिले जबकि डॉ. पांडेय 631 मत पाकर दूसरे नंबर पर रहे।

इसी प्रकार भाजपा जिलाध्यक्ष सर्वेश कुशवाहा भी अपने बूथ पर हार गए। अपने गांव कैथी में बूथ संख्या 37 पर भाजपा को मतदाताओं ने कम तवज्जो दी। यहां गठबंधन ने 427 तो भाजपा को मात्र 216 मत ही प्राप्त हुए।
इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव के प्रभारी अनिल सिंह के पैतृक गांव चहनिया के सर्फुद्दीनपुर में भी भाजपा को शिकस्त मिली। बूथ संख्या 21 पर कुल पड़े 516 मतों में भाजपा को मात्र 159 वोट मिले। जबकि सपा के प्रत्याशी को 342 वोट मिले।
भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह अपने पैतृक के गांव डबरियां में वोट की रखवाली करने में चूक गए। यहां बूथ संख्या 111 पर कुल 424 वोट पड़े। इसमें भाजपा को 172 तथा सपा को 240 मत मिले।
इन सबके बावजूद भाजपा ने दूसरों के गढ़ में सेंध लगाई और भाजपा का झंडा बुलंद किया। वह सपा के किले में सेंध लगाते हुए सपा जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर के गांव बरठी में अपने पक्ष में ज्यादा वोट प्राप्त किए। यहां के बूथ संख्या 294 पर कुल 763 मतदाताओं में 438 ने उन्हे वोट दिया। जबकि सपा को मात्र 261 वोट मिले।
सपा के पूर्व सांसद रामकिशुन यादव के गांव बौरी में एक बूथ पर सपा प्रत्याशी को मुह की खानी पड़ी। यहां बूूथ संख्या 241 पर कुल पड़े 752 मतों में 463 भाजपा तथा 249 वोट सपा के खाते में गया।