चंदौली लोकसभा सीट पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्रनाथ पांडेय कांटे की टक्कर में 13 हजार 424 मतों से जीत जरूर गए पर पिछली बार से हार-जीत का अंतर काफी घट गया, जिससे यह माना जा रहा है कि भाजपा को आने वाले समय में सावधान रहना है। डॉ. पांडेय ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रतिद्वंदी को एक लाख 56 हजार 736 मतों से पराजित किया था।

हालांकि इस बार कम अंतर से जीत के बावजूद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने चंदौली लोक सभा के चुनावों सर्वाधिक मत प्राप्त करने का रिकार्ड बना लिया है। डॉ. महेन्द्रनाथ को इस बार पांच लाख 10 हजार 711 मत मिले हैं। यह पिछले लोकसभा चुनाव में डॉ. पांडेय को मिले 04 लाख 14 हजार 135 से 96 हजार 576 मत अधिक हैं।

इसके साथ साथ वह मत प्रतिशत के हिसाब से देखे तो चंदौली में चौथे ऐसे प्रतिनिधि बने हैं जिन्होंने लगभग 47 प्रतिशत मत हासिल किया है।

यह है चंदौली का इतिहास

चंदौली जिले में सर्वाधिक मत प्राप्त करने का रिकार्ड देखे तो वर्ष 1977 में सर्वाधिक 74 प्रतिशत अर्थात दो लाख 89 हजार 376 मत किया था। इसके पूर्व वर्ष 1957 में कांग्रेस के त्रिभुवन नरायन सिंह ने 58 प्रतिशत मत हासिल किया था। उन्हें एक लाख 34 हजार 488 मत मिले।

इसके साथ ही साथ वर्ष 1989 में जनता दल से कैलाशनाथ सिंह यादव ने दो लाख 49 हजार 572 मत हासिल किए थे जो उस समय पड़े मतों का 51 प्रतिशत था।

इसके बाद चंदौली जिले में अधिकतर सांसदों को केवल 27 से 40 प्रतिशत मत ही हासिल हो सके। 1984 में कांग्रेस की चंद्रा त्रिपाठी ने दो लाख 1516 मत (45 प्रतिशत) मत हासिल किए। वर्ष 2014 में डॉ. महेन्द्रनाथ पांडेय ने चार लाख 14 हजार 135(42 प्रतिशत) मत हासिल कर रिकार्ड कायम किया।

पांच वर्ष के कार्य के बाद विपक्ष से मिल रही कड़ी टक्कर के बावजूद दूसरी बार डॉ. महेन्द्रनाथ पांडेय चुनाव जीत गए। इस बार पिछले चुनाव में मिले मतों से 96 हजार 576 अधिक मत प्राप्त किया। यह प्रतिशत के हिसाब से देखे तो 46.93 प्रतिशत था जो अब तक के चयनित सांसदों में चौथा सर्वाधिक मत प्रतिशत है।