वीडियो : NDRF के प्रयास से भी नहीं बची पिता व पुत्र की जान, निकाले गए दोनों के शव

वीडियो : NDRF के प्रयास से भी नहीं बची पिता व पुत्र की जान, निकाले गए दोनों के शव

चहनियां। चंदौली जिले के बलुआ थाना क्षेत्र के रामगढ़ गांव  में वर्षों पुराना पटा कुआं शुक्रवार की दोपहर के आसपास धंस गया। इससे चबूतरे पर बैठे 26 वर्षीय ज्योति भूषण पांडेय उर्फ दीपक कुएं के दलदल में समा गया। यह देखकर पास में बैठे पिता चंद्रबली पांडेय बेटे को बचाने में कूद पड़े। देखते ही देखते पिता व पुत्र दोनों कुएं में समा गए।

जब इस बात की जानकारी लोगों  पुलिस को दी तो पुलिस ने दोनों को बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ की मदद से काफी मशक्कत की, लेकिन दोनों को जीवित बाहर नहीं निकाला जा सका।

बचाया जा रहा है कि रामगढ़ निवासी चंद्रबली का एकलौता पुत्र ज्योति भूषण पांडेय अपने घर के सामने वर्षो पुराने पटे कुएं के चबूतरे पर बैठकर मोबाइल से बात कर रहा था। अचानक कुआ धीरे धीरे नीचे धसने लगा। वह जब तक कुछ समझ पाता, तब तक कुएं में समा गया। उसके ठीक सामने बरामदे में बैठे पिता चंद्रबली ने बेटे को बचाने के लिए छलांग लगा दी। देखते ही देखते पिता व पुत्र दोनों कुएं में समा गए। चंद्रबली की पत्नी सीमा रोते बिलखते शोर मचाने लगी। लोगों की भारी भीड़ जुट गई।

इसके बाद बलुआ एसओ धीरेंद्र कुमार भी मयफोर्स पहुंच गए। उन्होंने जेसीबी मंगाकर पहले मिट्टी हटाकर कुएं को साफ कराया। इसके बाद स्वयं रस्सी के सहारे कुएं में उतरे, लेकिन ऑक्सीजन की कमी के वह वापस आ गए। थक हार कर बलुआ एसओ ने वाराणसी एनडीआरएफ टीम को सूचना दी। चार घंटे के इंतजार के बाद टीम पहुंची। एसओ धीरेंद्र सिंह ने बताया कि कुएं में आक्सीजन नहीं है। कुएं में जहरीला गैस होने से दिक्कत आ रही है। एनडीआरएफ टीम तलाश में जुटी है।

 

जैसे ही बचाव दल का कोई सदस्य कुएं में उतरता, लोगों की सांस थम जा रही थी। उम्मीद जगती थी कि पिता-पुत्र भी बाहर निकलेंगे। लेकिन देर रात एनडीआरएफ की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद पहले पिता का शव निकाला। लोगों में आस बंधी रही कि पुत्र सलामत होगा। आधे घंटे बाद जैसे ही मलवे से पुत्र के शव को एनडीआरएफ की टीम ने बाहर निकाला, गांव में कोहराम मच गया। ग्रामीणों के साथ रिश्तेदारों की भी आंखे नम हो गई। बरबस लोग यहीं कहते रहे कि अगर भगवान को जान लेनी थी तो पिता की ले लेते। वहीं मां को जैसे ही जानकारी हुई की पति के साथ पुत्र भी अब इस दुनिया में नहीं रहा। मां के हृदय पर जैसे वज्रपात हो गया।

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