चंदौली के इस 'घोटालेबाज विधायक' पर कसेगा शिकंजा, स्मारक के घोटाले में कोर्ट का आदेश

चंदौली के इस ‘घोटालेबाज विधायक’ पर कसेगा शिकंजा, स्मारक के घोटाले में कोर्ट का आदेश

बसपा सरकार में बने स्मारक के घोटाले को लेकर हाई कोर्ट में मिर्जापुर के भवेश पांडे की जनहित याचिका को एक हप्ते की सुनवाई करते हुए तकनीकी कारणों से खारिज करते हुए लगभग 14 अरब के घोटाले में वर्तमान सरकार से जांच की तत्काल प्रगति रिपोर्ट प्रेस करने का आदेश दिया है।

गौरतलब है कि इस स्मारक घोटाले में चंदौली के एक वर्तमान विधायक तथा सोनभद्र के दो विधायकों द्वारा बिचौलिए के काम किए जाने को लेकर लोकायुक्त के जांच में उन पर भी उंगली उठी थी ,इस घोटाले में लगभग 95 लोगों को शामिल किया है इसमें बसपा सरकार के तत्कालीन दो कैबिनेट मंत्री भी शामिल थे इसमें लोकायुक्त के जांच के बाद विजलेंस ने इस मामले में लखनऊ के गोमती नगर थाने में मुकदमा भी दर्ज गया था ।

2014 में दर्ज मुकदमा में कोई प्रगति नही होने के कारण मिर्जापुर के भावेश पांडे ने सीबीआई जांच की मांग को लेकर के हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल किया था जिस पर हाईकोर्ट ने लगातार 1 हफ्ते सुनवाई करते हुए वादी के भाई संतोष पांडे को समारक निर्माण में ठीकेदार के रूप में शामिल होने और आपसी विवाद की तकनीकी मामले को देखते हुए इस याचिका को निरस्त कर दिया।

वहीं हाई कोर्ट ने इस घोटाले में वर्तमान में क्या प्रगति है और किस स्तर तक जा की जा रही है इसकी पूरी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।

कयास लगाया जा रहा है कि उस समय के मंत्री और विधायक अब भाजपा सरकार में शामिल हो गए हैं जिससे यह जांच कच्छप गति की तरह शिथिल हो गई है।

क्या है पूरा मामला

2007 में बानी बसपा सरकार ने स्मारक बनवाया था जिसमें राजस्थान से तरासकर पत्थर लगाने के लिए मंगवाए गए थे। इसमें 15 ट्रक को आना था जिसमें 8 ट्रक तो आए लेकिन और सात ट्रकों का माल पता नहीं चल पाया था। इस स्मारक निर्माण में कुल लगभग 41 अरब से अधिक रुपयों की लागत लगी थी, जिसमें लोकायुक्त ने जांच कर लगभग 14 अरब रुपए का भ्रष्टाचार उजागर किया है उसमें विभागीय अधिकारी सहित मंत्री विधायक और ठेकेदारों पर पैसों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है जिसको लेकर के उच्च न्यायालय ने जांच कर रही सरकारी एजेंसी से तत्काल इस मामले में हुई प्रगति की रिपोर्ट मांगी है।

हालांकि 2014 के बाद इस गड़े मुर्दे को उखाड़ने के बाद राजनीतिक गलियारों में फिर चहल कदमी बढ़ गई है। आरोप सत्ताधारी सरकार पर लगाया जा रहा है कि जहां बसपा में दागी रहे नेता आज भाजपा में विधायक बन गए हैं तो भाजपा सरकार भी इस दाग को अच्छी मान रही है और इन पर हो रही जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

अब देखना है कि कोर्ट के इस आदेश को सरकार कहां तक जांच की कार्रवाई को पूरा कर पाती है।

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