रामकिशुन बोले : भाजपा सरकार की नीयत में खोट, नहीं चाहती है किसानों का भला

रामकिशुन बोले : भाजपा सरकार की नीयत में खोट, नहीं चाहती है किसानों का भला

चंदौली जिले के समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने भाजपा सरकार को किसान विरोधी करार देते हुए कहा कि किसानों को लेकर सरकार की नीयत में ही खोट है। सरकार वाकई में आमदनी दोगुनी करने की मंशा रखती तो बांधों की स्थिति, नहरों की माली हालत को दुरुस्त करने का काम करने पर जोर देती। अधिकारी भी किसानों की समस्या पर गंभीरता से ध्यान देते। कोई बताए क्या यह सब चंदौली जिले में होता दिख रहा है।

रामकिशुन ने कहा कि जब धान में चावल (रेड़ा पर) पड़ने लगता है उस वक्त सिंचाई को पानी नहीं मिल पा रहा। मजबूरी में परेशान किसान संग्राम करने की राह पर हैं। अफसरों से शिकायत, जनप्रतिनिधियों से गुहार के बाद भी बात नहीं बनी तो गांधीवादी आंदोलन किए जा रहे। शुरूआत अब एक कदम और आगे बढ़ते हुए खेत पाटने जैसी उग्रता की ओर बढ़ रही।

पूर्व सांसद किसानों की मुश्किलों को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात करने आए थे। वहां से निकले तो किसानों के मसले पर बातचीत में सरकार को घेरने की कोशिश की। बोले, चंदौली धान का कटोरा है। इसे सहेजने की तैयारी किसी स्तर पर नहीं हो रही।

रामकिशुन ने कहा कि बांधों की मरम्मत को सरकार गंभीर नहीं है। साल-दर-साल बांधों की हालात के मुताबिक पानी का लेवल मेंटेन करने के स्तर को इंजीनियर घटा दे रहे। बांध फौलादी होते तो दो तरह का लाभ होता। किसानों के हिस्से के पानी को संजोकर तो रखा ही जाता बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोक इसी पानी से बाद में सिंचाई भी होती। आखिर किसानों की आमदनी दोगुनी कैसे होगी।

नहर, माइनर, कुलावे क्षतिग्रस्त, चोक होने से मुश्किलें कम नहीं हो पा रही। सरकार समर्थन मूल्य में मामूली निर्णयों से अपने फेवर में माहौल बनाना चाहती है। नीयत साफ हो तो मृदा की जांच जमीन पर कराएं, नहरों की समय से सफाई हो, बांधों के लिए प्रत्येक एक-दो साल के अंतराल पर बजट जारी किया जाए, उसके बाद अंतिम चरण में समर्थन मूल्य की बारी आती है। क्योंकि तब ज्यादा पैदावार होने पर किसानों के पास खाने के बाद बेचने को अन्न होगा, उनकी जेब भरेंगी और खुशहाली आएगी।

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