चंदौली जिले में चुनाव में जहां सारा महकमा ब्यस्त है,वहीं बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों के खेल सामग्री का घोटाला करने में मस्त है। जनपद के चहनियां ब्लाक के सभी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर बच्चों के खेल सामग्री की खरीद करनी थी, लेकिन विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से ठेकेदारी प्रथा के द्वारा अध्यापकों को बिना बताए ही थर्ड क्वालिटी की खेल सामग्री खरीद कर बोरे में बंद करके संकुल प्रभारियों द्वारा जबरदस्ती विद्यालयों पर पहुंचवाया गया है। उसके बदले में प्राथमिक से 5000 और उच्च प्राथमिक विद्यालय से 10,000 रुपये का चेक कटवा लिया जा रहा है ।

 खेल सामग्री खरीदने के लिए खाते में क्रमशः 5 हजार और 10,000 रुपये प्रधानाध्यापकों को सरकार द्वारा भेजा गया है और उसमें निर्देश दिया गया है कि प्रधानाध्यापक और अभिभावकों की एक कमेटी के द्वारा मानक के अनुरूप खेल सामग्री की खरीद करनी है । यही नहीं अध्यापकों द्वारा चेक नहीं काटने पर और सामान को खराब बताने पर उनकी उपस्थिति सहित अन्य कमियों को गिना कर उनको परेशान करने की भी कार्यवाही की जा रही है ।

 

इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी चहनिया द्वारा जब बात किया गया तो अपने को बेदाग साबित करते हुए बताया कि गुणवत्ता विहीन सामान को रिसीव नहीं करना चाहिए और चेक नहीं देना चाहिए।

यह गोलमाल का खेल चहनिया विकास खंड में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात है कि बिल पूरे दस हजार का बना है लेकिन उस पर किसी का नाम पता भी नही है। सादा बिल विद्यालयों को थमा दिया गया है। इतने बड़े पैमाने पर घोटाला बिना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से संभव नहीं हो सकता । मारुफपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय पर भेजे गए सामग्रियों के मानक की गुणवत्ता एक दिन में ही पता चल गया,जब बच्चों द्वारा खेलते समय बाल एक दिन में ही दो टुकड़ों में हो गई और स्टंप टूट गया यही नहीं उनको जो सामान दिया गया है उनके जिंदगी के लिए घातक भी साबित हो सकता है । सपाट मारने वाला प्लास्टिक का दिया गया है । बच्चे ऐसे सामानों से लाभान्वित नहीं बल्कि घायल भी हो सकते हैं।