ADO साहब 5 पर्सेंट एडवांस में नकद मांगते हैं, कहते हैं उपर तक जाता है

कमीशन मामले पर रूबरू हुए ताजपुर के प्रधान अमित सिंह

सकलडीहा। स्थानीय ब्लॉक के ताजपुर के ग्राम प्रधान अमित सिंह ने जब ग्राम प्रधानी का चुनाव जीता था तो उनकी आंखों में गांव के विकास का एक सपना था। अब यह विकास का सपना जिले के ‘घूसखोर’ व एडवांस में कमीशन मांगने वाले अफसरों के चलते धूमिल हो रहा है। हमारे संवाददाता अश्विनी मिश्रा ने ग्राम प्रधान से बात की तो पता चला कि यहां के अफसर किस तरह प्रधानमंत्री की मुहिम को पलीता लगा रहे हैं। पेश है विशेष साक्षात्कार….
सवाल 1.. क्या है आईडी व पासवर्ड का मामला क्यों चाहिए यह..इसके बिना क्या नहीं हो सकता है ?

जवाब.. अमित सिंह ने बताया कि 14 वे वित्त आयोग का पैसा सीधे ग्राम प्रधानों के खाते में आ चुका है इसे निकाल कर विकास कार्यों पर खर्च करने के लिए आईडी व पासवर्ड की जरूरत है। गांवों की कार्ययोजना 6 माह पूर्व बनने के बाद भी ग्राम पंचायतों का विकास कार्य भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ा गया है। कार्ययोजना जलाधिकारी के स्वीकृत होने के बाद भी ID देने में ब्लॉक के कर्मचारी आनाकानी करते हैं।

सवाल 2.. कितना पैसा एक प्रधान के खाते में आया है और कब से पड़ा है..

जवाब..प्रधान जी ने बताया कि हमारे यहां 5 लाख 76 हजार रुपये खाते में पड़ा है और कमीशनखोरी के चलते कार्य नहीं हो रहा है। यही नहीं, ब्लाक के 104 गावों में से भ्रष्ट अफसरों के मानक पर खरे उतरने वाले और एडवांस में कमीशन देने वाले 6 गांवों को ही ID दिया गया है।

सवाल 3.. कितना कमीशन मांग रहे हैं और कैसे पैसा लेना चाहते हैं। नकद व एडवांस या और किसी तरीके से।

जवाब..उन्होंने सीधा आरोप सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) पर लगाते हुए बताया कि उनके द्वारा 5 परसेंट कमीशन की मांग की जाती है। इतना ही नहीं पैसा एडवांस और नगद माँगा जाता है और कहा जाता है कि ऊपर तक अधिकारियों को देना पड़ता है।

सवाल 4. कौन कौन है इस वसूली के खेल में शामिल, किनको किनको चाहिए कमीशन..

जवाब.. जब पैसा उपर तक जाता है तो आप समझ लीजिए..क्यों हमारे मुंह से सुनना चाहते हैं। अगर कमीशनखोर अफसर न होते तो कर्मचारियों की हिम्मत नहीं होती कि वे 6 महीने से विकास के पैसे पर कुंडली मार कर बैठे रहें।

सवाल 5.. कभी जिले के अधिकारियों से वसूली करने वालों की शिकायत करी या नहीं…

जवाब… शिकायत क्या क्या करी जाय..कौन सुनेगा..लगता है कुएं में भांग पड़ी है..भारत स्वच्छता मिशन में ब्लाक के पांच गांवों में चयनित हमारे ग्राम सभा के हरिहरपुर राजस्व गांव में शौचालय के नाम पर एक रूपया नहीं आया है। यही नहीं चयनित किसी भी गांव में पैसा नहीं गया है जबकि जिस गावों का चयन नहीं हुआ है, वहां सुविधा शुल्क के चलते शौचालय का धन आवंटित कर दिया गया है। इसकी लिखित शिकायत की है । पर मामला जिलाधिकारी के यहाँ अटका है। भगवान जाने क्या मामला और क्या मंशा है।

mishra

Comments

comments