कहा जा रहा है कि चंदौली जिले की ऐतिहासिक चंधासी कोयला मंडी में कई कारोबारियों के हाथ भ्रष्टाचार की कालिख में सने हो सकते हैं। जरूरत है केवल इमानदारी से जांच पड़ताल करने की। माना जा रहा है कि गरीब कर्मचारियों को धन का प्रलोभन देकर उनके नाम फर्म बनवाकर टैक्स की चोरी की जा रही है।

हालांकि ऐसा पहला मामला संज्ञान में आने के बाद जांच में जुटी पुलिस को चौंकाने वाली जानकारियां प्राप्त हो रही हैं। यह भी स्पष्ट हो चुका है कि कि बोगस फर्म कर्मचारी की सहमति के बाद ही बनाए जाते हैं। इसमें सेल टैक्स और जीएसटी कर्मचारियों की मिली भगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

जीएसटी लागू होने के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया काफी जटिल और कुछ हद तक पारदर्शी हो चुकी है। लेकिन पहले बिना पचड़े के कुछ धन खर्च कर सेल टैक्स में रजिस्ट्रेशन हो जाता था। व्यवस्था की इस खामी का चंधासी कोल मंडी के कुछ कारोबारियों ने बखूबी फायदा उठाया। अपने मुलाजिमों मसलन मुंशी और ड्राइवर आदि के नाम फर्म बना टैक्स की चोरी करते रहे। कुछ ने जीएसटी में भी धोखे से पंजीकरण करवा लिया हैं।

हालांकि जांच में जुटी पुलिस का यह भी मानना है कि कर्मचारी की सहमति के बगैर पंजीकरण संभव नहीं है। लेकिन कुछ धन के लालच में कर्मचारी इसके लिए तैयार हो जाते हैं। कर विभाग का शिकंजा कसने के बाद कर्मचारी भागे-भागे फिरते हैं।

सीओ सदर त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि एक करोड़ 40 लाख रुपये टैक्स चोरी के मामले में आरोपित कारोबारी के फर्म आदि की जांच की जा रही है। इसने विभिन्न नामों से 10 फर्में बनवा रखी हैं, जिसके पुख्ता प्रमाण सामने आ रहे हैं। पुलिस शीघ्र ही ऐसे मामलों को सामने लाएगी।