अबकी बार धान खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था, यह है तैयारी

अबकी बार धान खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था, यह है तैयारी

चंदौली। जिले के किसान फिलहाल अभी धान की रोपाई में जुटे हैं। पर सरकार की ओर से धान की खरीद को लेकर कुछ तैयारियां अभी से  शुरू कर दी जा रही हैं, जिससे किसानों को परेशानी न हो। इससे सरकार को भी अपनी तैयारी करने में मदद मिलेगी।

बताया जा रहा है कि अगर अब आपको धान विक्रय केन्द्र पर अपना धान बेंचना है तो किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया जारी है। यह प्रकिया 31 अगस्त तक चलेगी। पंजीकरण के बारे में विभाग के पोर्टल पर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इसका अवलोकन कर किसान अपना पंजीकरण किसी भी जनसुविधा केंद्र अथवा साइबर कैफे से करा सकते हैं।

एक नवंबर से शुरू होगी खरीद

अस मामले पर अधिकारियों का कहना है कि इस साल जिले में धान खरीद एक नवंबर से शुरू हो जाएगी।

बताया जा रहा है कि खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में मूल्य समर्थन योजना के तहत धान की खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पहली बार बिचौलियों में प्रभावी नियंत्रण को खाद्य विभाग के पंजीयन पोर्टल को राजस्व विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा गया है। ताकि भूमि के रकबे का ऑनलाइन विवरण प्राप्त किया जा सके।

साथ ही संबंधित तहसील के एसडीएम व तहसीलदार के माध्यम से फसल के रकबे का ऑनलाइन सत्यापन कराया जा सके। इसके लिए सभी एसडीएम को एनआईसी की ओर से खाद्य विभाग के पोर्टल पर लागिन पासवर्ड उपलब्ध कराया जा रहा है।

बिचौलियों पर प्रभावी नियंत्रण

खाद्य विपणन अधिकारी अनूप श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में पहली बार बिचौलियों पर प्रभावी नियंत्रण रखने को लेकर धान खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। खाद्य विभाग के पंजीयन पोर्टल को राजस्व विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे किसानों के भूमि के रकबे का विवरण प्राप्त किया जा सके।

 

ऐसा होगा नियम

क्रय केंद्र पर धान बेचने के समय किसान को पंजीयन प्रमाण पत्र के साथ बैंक खाता पासबुक एवं आधार मूलरूप से केंद्र प्रभारी के समक्ष अकित विवरण से मिलान के लिए प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद ही धान की खरीद की जाएगी।

ऐसे होगा सत्यापन

धान खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया के तहत एसडीएम व तहसीलदार की ओर से किसान के भूमि के रकबे का ऑनलाइन सत्यापन खाद्य विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराए गए लागिंग के माध्यम से किया जाएगा। सत्यापन के बाद जिले की उत्पादकता एवं फसल के रकबे के आधार पर अधिकतम बेची जाने वाली मात्रा का आकलन पंजीयन माड्यूल से प्रपत्र पर अंकित हो जाएगा। इस प्रक्रिया से किसान भूमि के रकबे से अधिक धान क्रय केंद्र पर नहीं बेच सकेंगे।

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