किसानों के विरोध पर बैरंग लौटे जमीन अधिग्रहण करने गए अधिकारी, रामकिशुन भी आये आगे

किसानों के विरोध पर बैरंग लौटे जमीन अधिग्रहण करने गए अधिकारी, रामकिशुन भी आये आगे

चंदौली । जिले के रेवसा गांव में मंगलवार को डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर कारपोरेशन (डीएफसीसी) को जमीन अधिग्रहण करने लाव लश्कर के साथ गए प्रशासन को किसानों के विरोध पर बैरंग होना पड़ा। ग्रामीणों ने प्रशासन का जमकर विरोध किया, नारेबाजी की। अधिकारियों की कई बार किसानों संग बैठक हुई, उन्हें मनाने की कोशिश की लेकिन नाकामी हाथ लगी। किसानों के धरना, प्रदर्शन को उग्र होते देख एसडीएम फोर्स के साथ लौट आए।

कॉरीडोर का रेलवे लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। रेवसा गांव में किसानों का लंबे समय से विरोध चल रहा है। मंगलवार को प्रशासन ने प्रयास भी किया। विरोध ऐसा हुआ वहां काम शुरू नहीं हो सका। कई बार काम शुरू कराने को प्रशासन ने कोशिश की, लेकिन हर बार किसानों का विरोध हुआ। सुबह ही जिले भर के एसडीएम, सीओ सदर भारी पुलिस बल के साथ कारीडोर का काम शुरू कराने वहां पहुंच गए। प्रशासन के लोग जेसीबी मशीन, हाइड्रोलिक जेसीबी, रोलर आदि थी साथ लेकर गए। पर जैसे ही किसानों को सूचना मिली, वहां बड़ी संख्या में स्थानीय गांव समेत आसपास के गांवों के किसान पहुंच गए। किसानों ने मशीनों के समक्ष बैठकर धरना शुरू कर दिया। काफी देर तक अधिकारियों का वार्ता का दौर चला।

एसडीएम मुगलसराय मनोज कुमार, एसडीएम सदर विकास सिंह, एसडीएम चकिया दीप्ति देव, सीओ सदर प्रदीप सिंह चंदेल ने किसानों से अपने अपने स्तर पर वार्ता करने का प्रयास किया लेकिन वे मानने को तैयार ही नहीं थे। किसान विरोध में प्रशासन के समक्ष तन कर खड़े रहे। अंतत: प्रशासन को लौटना पड़ा।

विरोध करने वालों में किसान नेता केदार यादव, महेंद्र प्रताप, कपिल यादव, विक्की प्रधान, निरंजन यादव, संतोष यादव, विजय वार्डर, रहमान, कैलाश भगत, संजय गोंड आदि शामिल थे।

किसानों ने हवाला दिया कि पूर्व एडीएम संतोष कुमार ने 8 नवंबर 2011 को लिखित रूप से आश्वासन दिया था कि किसानों को मुआवजा के एवज में 28 हजार प्रति बिस्वा दिया जाएगा। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाएगी। इसी बात पर किसान अपनी जमीन देने को राजी हो गए थे। इस समय वहां की जमीन का मूल्य अधिक है। सरकार ने अभी गंजख्वाजा में 9 लाख से लेकर 13 लाख रुपये प्रति बिस्वा के रेट से मुआवजा दिया था। समानता के आधार पर उसी रेट का मुआवजा रेवसा के किसानों को भी मिलना चाहिए।

पूर्व सांसद ने की वार्ता

किसानों के इस आंदोलन में पहुंचे पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने किसानों और अधिकारियों से भी वार्ता की। उन्होंने किसानों के साथ किसी भी तरह का अन्याय न होने की प्रशासन को हिदायत दी। कहा किसानों से वार्ता कर आपसी सहमति बनाकर ही अधिकारी कोई काम करें, अन्यथा किसानों का विरोध जारी रहेगा। पूर्व सांसद ने कहा कि किसानों ने कमिश्नर के यहां भूमि के रेट पर विचार करने को अपील की थी। जिसका संज्ञान लेते कमिश्नर ने एडीएम चंदौली को पुनर्विचार की बात कही थी, जिसमें रेट रिवाइज हो गया था। एडीएम के निर्णय के विरोध में फ्रेड कारिडोर के लोग कमिश्नर के यहां फिर से अपील की, जिसमें एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए आर्डर किया गया।

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