चंदौली जिले के शहीदगांव के जच्चा बच्चा केंद्र पर शुक्रवार को प्रसव के दौरान महिला की हालत बिगड़ गई। एएनएम ने धानापुर सीएचसी रेफर कर दिया। जहां उसकी हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने जिला अस्पताल भेज दिया। लेकिन रास्ते प्रसूता सुमन विश्वकर्मा की मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों में खलबली मची रही। परिजनों ने सरकारी अस्पताल में मनमानी व लापरवाही का आरोप लगाया।

धानापुर थाना क्षेत्र के श्रीकांतपुर गांव निवासी प्यारे विश्वकर्मा की पुत्री 29 वर्षीया सुमन की 2006 में सकलडीहा कोतवाली अंतर्गत रानेपुर गांव निवासी सियाराम विश्वकर्मा के पुत्र महेश के साथ शादी हुई थी। दंपती को 6 वर्ष का एक पुत्र है। एक माह पहले ही सुमन प्रसव के लिए मायके आई थी। परिजनों ने शुक्रवार की सुबह प्रसव पीड़ा होने पर सुमन को लेकर शहीदगांव जच्चा बच्चा केंद्र पहुंचे।

आरोप है कि वहां आशा व एएनएम ने नार्मल डिलेवरी का आश्वासन देकर सुबह लगभग साढ़े 10 बजे के बाद प्रसव करा दिया। सुमन ने नवजात बेटी को जन्म दिया। लेकिन दोपहर लगभग दो बजे सुमन की हालत बिगड़ने लगी। स्वास्थ्य कर्मियों ने हाथ खड़ा कर दिया। उसे इलाज के लिए सीएचसी धानापुर ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने हालत नाजुक देख जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में ही सुमन की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। रोते बिलखते परिजन शव लेकर श्रीकांतपुर ससुराल पहुंचे।

परिजनों ने आशा, एएनएम समेत डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।

सीएचसी अधीक्षक डॉ. जेपी गुप्ता का कहना है कि इसमें कोई लापरवाही नहीं हुई है। अलबत्ता उपकेंद्र पर पहुंची महिला का सुरक्षित प्रसव कराया गया। खून की कमी के कारण हालत बिगड़ने लगी, तो उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां पहुंचने से पहले रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।