रेल कॉरिडोर के प्रोजेक्ट के मैनेजर ने परिवार सहित मांगी नाग देवता से माफी, फिर क्या हुआ

रेल कॉरिडोर के प्रोजेक्ट के मैनेजर ने परिवार सहित मांगी नाग देवता से माफी, फिर क्या हुआ

चंदौली जिले में 5 दिन से लगातार प्रगट हुए भोले बाबा का चल रहे खेल के आगे आज रेलवे प्रशासन के अधिकारी भी नतमस्तक होकर मंदिर में पूजा कर प्रतिज्ञा की कि अब नए मंदिर का निर्माण होने के बाद ही मंदिर परिसर में रेलवे का कार्य होगा।।

 

बताते चलें कि रेल कॉरिडोर के प्रोजेक्ट के तहत कोलकाता से मुगलसराय के बीच बन रहे रेल लाइन के बीच में अति प्राचीन शिव मंदिर आ जाने के कारण जब रेल अधिकारी उस मंदिर को क्षति पहुंचाने पहुंचे तो वहां से साक्षात शिव के रूप में एक सर्फ प्रगट हुआ जो कि रेलवे लाइन से लेकर मंदिर तक के भ्रमण करता रहा लगभग रोज यह प्रक्रिया चल रही थी और जब उसको कोई क्षति पहुंचाने का कार्य करता तो वह उसी क्षण अदृश्य भी हो जा रहा था लेकिन जब रेल प्रशासन के प्रोजेक्ट मैनेजर मौके पर पहुंचकर अपने सपरिवार बच्चों के साथ दर्शन की तो और उन्होंने भगवान से यह कहा कि जब तक एक भव्य मंदिर का निर्माण हो कर उसमें आपको स्थापित नहीं किया जाएगा तब तक इस प्राचीन मंदिर को कोई क्षति तक नहीं करेगा।

 

इसके बाद साक्षात शिव के रूप में प्रकट हुए सर्प देव कुछ शांत हुए। लेकिन आश्चर्य तब हुआ जब सर्फ के मुंह पर चोट लगने के कारण मंदिर में अति प्राचीन शिवलिंग के सामने भी चोट का अंश दिखाई दिया तभी से लोग इस कलयुग में शिव के साक्षात रूप में प्रकट हुए इन नाग देवता की पूजा अर्चना करते हुए उनके शांत करने की कार्यवाही में जुट गए । उसी क्रम में आज प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे सुशील कुमार मिश्रा के परिजनों को पता चला तो वह भी अपने घर से आकर साक्षात शिव मंदिर में शिव के रूप में प्रकट हुए सर्व देव का पूजा अर्चना कर उन्हें शांत कर, परिवार के कल्याण का कल्याण की कामना की शांत करने व परिवार की कल्याण की कामना की।

उनकी वृद्ध माँ ने भगवान के सामने कहा कि मेरे बेटे से गलती हो गई है क्योंकि वह नौकरी के लिए यह कार्य किया था ना कि आपको किसी प्रकार का कष्ट पहुंचाने के लिए तब जाकर नाग देवता शांत हुए और अब एक भव्य मंदिर का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया है ।तब जाकर नाग देवता प्रसन्न हुए।

वहीं मौजूद प्रोजेक्ट मैनेजर सुशील कुमार मिश्रा ने बताया कि यह जो सांप के रूप में दिखाई दे रहे हैं यह भोले शंकर का साक्षात रूप में और इन्हें रूस्ट करके कोई भी कार्य नहीं किया जा सकता इसलिए अब विधि पूर्वक यहां के ग्रामीण व भगवान शंकर के मंशा के अनुरूप मंदिर बनने के बाद ही इस मंदिर पर कार्य किया जाएगा इसीलिए मैं आज सोमवार के दिन पूरे परिवार के साथ भोले नाथ का दर्शन करने और क्षमा मांगने आया हूं।

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