आज आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि (गुरु पूर्णिमा) को चंद्रग्रहण लग रहा है। मंगलवार की मध्य रात्रि में चंद्रग्रहण लगेगा पर मंदिरों में पूजा पाठ व प्रवेश सूतक लगने से नौ घंटे पहले ही शाम 4.30 बजे से ही वर्जित हो जायेगा। ऐसे में सूतक लगने से पूर्व ही सभी मंदिरों में संध्याकालीन आरती करके मंदिरों का कपाट बंद कर दिया जाएगा, जो अगले दिन बुधवार की सुबह खुलेगा।

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 16 जुलाई की रात 1.31 बजे चंद्रग्रहण का स्पर्श होगा। ग्रहण की मध्य अवधि 3.1 बजे होगा। ग्रहण का मोक्ष 4.30 बजे भोर में होगा। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि 2.59 घंटा होगी। ग्रहण का स्पर्श उत्तरा आषाढ़ नक्षत्र प्रथम चरण धनु राशि में होगा। मोक्ष उत्तरा आषाढ़ द्वितीय चरण मकर राशि में होगा। अत: इस नक्षत्र में जन्म लेने वालों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और उन्हे ग्रहण नहीं देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहण में नौ घण्टे पहले और सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है। ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं के उदर पर गोमय (गाय का गोबर)का पतला लेप गर्भ की सुरक्षा के लिए लगानी चाहिए। विशेष खाद्य पदार्थ में कुश या तुलसी का पत्ता रखा जाता है। इससे ग्रहण का असर उक्त खाद्य पदार्थ पर नहीं होगा।

सूतक अवधि में स्वस्थ व्यक्ति को भोजन नहीं करना चाहिए। साथ ही मंदिर में प्रवेश भी निषेध रहता है। हालांकि वृद्ध, रोगी एवं अस्वस्थ व्यक्ति भोजन कर सकते हैं। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सूतक लगने से पूर्व ही मंदिरों में संध्या आरती करके मंदिर का कपाट बंद कर दिया जायेगा। ग्रहण की अवधि में सभी को पूजा पाठ करनी चाहिए। ग्रहण के दौरान किया गया जप, तप फलदायी होता है।