विश्वनाथ कुशवाहा ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को दान कर दिया अपना शरीर

विश्वनाथ कुशवाहा ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को दान कर दिया अपना शरीर

विश्वनाथ कुशवाहा ने अपना पूरा शरीर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के रचना शरीर विभाग को दान कर दिया है। वर्ष 2002 में कागजी कार्रवाई भी पूरी हुई। विश्वनाथ कुशवाहा का मंगलवार की सुबह निधन हो गया। परिजनों व ग्रामीणों ने गाजे बाजे के साथ अंतिम विदाई दी। साथ ही शव को बीएचयू ले जाया गया।

रानेपुर (बिशुनपुरवा) गांव के विश्वनाथ कुशवाहा ने कोलकता के एक कॉटन मिल से जीविकोपार्जन की शुरुआत की थी। कम्युनस्टि विचारधारा से प्रेरित होकर ट्रेड यूनियन में मजदूर नेता के रूप में शोषण के विरुद्ध हमेशा सक्रिय रहे। 1958 में हाईस्कूल की शिक्षा हासिल कर मार्क्स के साहित्य के अध्ययन में जुटे रहे। उनके अंदर समाज के उपेक्षित व गरीबों के लिए कुछ करने की भावना जागृत हुई।

उनकी पत्नी धनदेई देवी गृहिणी है। पुत्र अजय होम्योपैथ डॉक्टर, दूसरा पुत्र अरूण प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक और तीसरा पुत्र बादल खेती किसानी करता है। बेटी ऊषा की शादी हो चुकी है।

परिजनों ने बताया कि वर्ष 2002 में विश्वनाथ सिंह बिना परिवारीजनों को बताए बीएचयू पहुंच गए। उन्होंने डॉ. माण्डवी सिंह से मिलकर मरणोपरांत शरीर दान करने की इच्छा जतायी।

डॉक्टरों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए सारी कागजी कार्रवाई पूरा किया। इधर, कुछ दिनों से विश्वनाथ कुशवाहा बीमार चल रहे थे। वह परिजनों से बार-बार बीएचयू लेकर चलने की जिद भी कर रहे थे। उनके पुत्र डॉ. अजय ने बताया कि पिताजी के इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव शरीर बीएचयू ले जाया गया।

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