लोकसभा में चुनाव में सवर्ण वोटर पूछेंगे सवाल : जब आपको हमारी चिंता नहीं, तो क्यों दें आपको वोट

लोकसभा में चुनाव में सवर्ण वोटर पूछेंगे सवाल : जब आपको हमारी चिंता नहीं, तो क्यों दें आपको वोट

लोकसभा के आगामी चुनाव में एससी-एसटी एक्ट में किए गए बदलाव के बाद ऊंची जाति के लोगों में भारतीय जनता पार्टी समेत अन्य दलों के नेताओं के प्रति भी खासी नाराजगी देखी जा रही है। आम जनता का यही मानना है कि सारे राजनीतिक दल वोट की लालच में इस एक्ट का विरोध करने से कतरा रहे हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में यह मुद्दा कई सांसदों के गले की फांस बनेगा।

भारतीय जनता पार्टी ने परंपरागत वोट बैंक को छोड़कर दलितों को रिझाने में जुटी हुई है तो वहीं इस एक्ट की शुरुआत करने वाली कांग्रेस पार्टी भी इसको लेकर अपनी मंशा साफ नहीं कर पा रही है। बहुजन समाज पार्टी के साथ गठबंधन के चलते समाजवादी पार्टी के इस एक्ट  के दुरुपयोग को लेकर कई बार हंगामा करने का काम पहले कर चुकी है लेकिन इस समय चुप है।

इस तरह से देखा जाए तो सारे नेता और सारी पार्टियां इस एक्ट के समर्थन में खड़े हैं। कोर्ट का आदेश पलटते हुए संसद में नया कानून बन गया पर किसी ने वोट की लालच में चूं तक नहीं की।

आप लोगों को लगता है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में जब मौजूदा सांसद महेंद्र नाथ पांडे सहित अन्य तमाम सवर्ण उम्मीदवार या पिछड़े दलों के उम्मीदवार जब सवर्ण वोटरों के पास  वोट मांगने के लिए जाएंगे तो जनता इन उम्मीदवारों से  पूछेगी कि आखिर आपने sc-st एक्ट का विरोध क्यों नहीं किया।

कहा जा रहा है कि कई सांसद व विधायक तो इस एक्ट के विरोध में है, लेकिन खुलकर अपने दल के बड़े नेताओं के आगे कुछ कह नहीं पा रहे हैं। पर उन्हें डर है कि उम्मीदवार के रुप में जब वोट मांगने जाएंगे तो वोटरों को क्या जवाब देंगे।

एक सवर्ण जाति के नेता ने कहा कि अब हम लोग अपनी ओर से सभी अगड़ी व पिछड़ी जातियों के लोगों को इसके दुरुपयोग से होने वाली तमाम समस्याओं को समझाएंगे..साथ ही यह तीन बातें बताएंगे….

भलेही नेता यह कहें कि इसका दुरुपयोग नहीं होगा..पर अगर हो गया तो क्या करेंगे..कोई जेल चला गया या झूठे मामले में फंस गया तो क्या उतने दिनों तक उनके परिवार की देखभाल करेंगे..?

क्या वोट मांगने वाले नेता इस तरह के हर मामले की तह में जाएंगे और जानने की कोशिस कर पाएंगे कि कौन सही है और कौन गलत..?

जरा सोचिए जो सांसद या विधायक आपकी सामान्य व गांवभर की किसी समस्या के लिए फोन नहीं उठाते हैं या पांच साल झांकने नहीं आते हैं..वो क्या आपके इस मामले में फंसने पर बचाने आ जाएंगे।

 

( नोट…यह एक चंदौली जिले के वोटर का दर्द है, जिस खबर का रूप दिया गया है..)

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