भारत में मधुमेह बीमारी तेजी से बढ़ी है और इस बीमारी में मरीज का शरीर इंसुलिन का उत्पादन करने में सक्षम नहीं होता है या फिर उपलब्ध इंसुलिन का इस्तेमाल नहीं कर पाता। ऐसे में मधुमेह विशेष बीमा योजना खरीदने से पहले रखें कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।

भारत में 7 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित है। भारत दुनिया की मधुमेह राजधानी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की हाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत में करीब 9.8 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित होंगे।पॉलिसीबाजार के स्वास्थ्य बीमा के प्रमुख अमित छाबड़ा का कहना है कि मधुमेह के लिए पर्याप्त और किफायती स्वास्थ्य बीमा लेना जरूरी है। इससे जरूरी दवाइयां खरीदने में मदद मिलेगी और किसी जटिलता की स्थिति में बड़े अस्पतालों में महंगा इलाज कराने में भी मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा, “एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, गरीब शहरी आबादी अपनी आय का करीब 34 फीसदी मधुमेह के इलाज पर खर्च करती है, जबकि ग्रामीण आबादी इसी पर 27 फीसदी खर्च करती है।”मधुमेह के रोगियों के लिए पहले स्वास्थ्य बीमा प्राप्त करना एक मुश्किल काम था, लेकिन अब यह आसान है।

मधुमेह रोगियों के लिए मधुमेह विशिष्ट बीमा योजना महत्वपूर्ण है क्योंकि नियमित स्वास्थ्य बीमा प्लान मधुमेह को एक पहले से मौजूद बीमारी मानती है, और इसके इलाज के लिए प्रतीक्षा अवधि रखती है, जो एक साल से दो साल तक का है। कई बार तो यह 4 साल तक चला जाता है। इसलिए पर्याप्त कवरेज और त्वरित निदान के लिए मधुमेह विशिष्ट कवरेज खरीदना जरूरी है।

स्टार हेल्थ इंश्योरेंस मधुमेह सुरक्षित बीमा पॉलिसी मुहैया कराता है, जो पति और पत्नी दोनों के लिए दो योजनाओं ए और बी में उपलब्ध है। इसे 18 से 65 साल की उम्र के मधुमेह से पीड़ित कोई भी व्यक्ति खरीद सकते हैं, जिसकी बीमे की रकम 3 लाख, 5 लाख और 10 लाख रुपये है। प्लान ए की कोई प्रतीक्षा अवधि नहीं है, जबकि प्लान बी की 12 महीने प्रतीक्षा अवधि है।

अपोलो म्यूनिख स्वास्थ्य बीमा की एनर्जी स्वास्थ्य बीमा योजना में कोई प्रतीक्षा अवधि नहीं है और मधुमेह और उच्च रक्तचाप के कारण अस्पताल में भर्ती होने को कवर करती है। एनर्जी एक ऐसा पैकेज है जो अस्पताल के खर्च और व्यक्तिगत बीमा राशि के आधार पर कवरेज प्रदान करता है।

गाते गुनगुनाते रहने से याददाश्त रहती है सही लंदन, 21 फरवरी (भाषा) एक अध्ययन में सामने आया है कि अधेड़ उम्र में शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहने पर बाद की उम्र में स्मृति लोप होने का खतरा घट जाता है। न्यूरोलोजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार मानसिक गतिविधियों में पढ़ना, वाद्ययंत्र बजाना, सामूहिक गायन, विभिन्न कार्यक्रमों में जाना, बागवानी करना, कसीदाकारी संबंधी कार्य, धार्मिक कार्यक्रमों में जाना आदि शामिल हैं। स्वीडन के
गोदनबर्ग विश्वविद्यालय के जेन्ना नजर ने कहा, ‘‘ये नतीजे संकेत करते हैं कि अधेड़ उम्र की ये गतिविधियां बुढ़ापे में स्मृति लोप को रोकने और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को संरक्षित रखने में भूमिका निभा सकती हैं। ” नजर ने एक बयान में कहा, ‘‘यह रोमांचक है क्योंकि ये ऐसी गतिविधियां हैं जिन्हें लोग बड़ी आसानी से और बिना ढेर सा पैसा खर्च किये अपने जीवन में शामिल कर सकते हैं।” स्वीडन में 800 महिलाओं पर यह अध्ययन किया गया जिनकी औसम उम्र 47 थीं।