स्व. सागर सिंह की 103 वीं जयंती पर अधिवक्ताओं ने किया याद, कार्यों व व्यक्तित्व पर भी चर्चा

चंदौली जिले के जिला मुख्यालय पर कचहरी स्थित सिविल बार सभागार में समाजवादी चिंतक, स्वंत्रता संग्राम सेनानी एवं प्रदेश बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष प्रख्यात अधिवक्ता स्वर्गीय सागर सिंह की 103वीं जयंती मनाई गई। इसका शुभारम्भ मुख्य अतिथि अपर सत्र न्यायाधीश राजेंद्र सिंह ने दीप प्रज्जवलित कर किया। वहीं उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। साथ ही उनके कृत्यों और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया।

मुख्य अतिथि अपर सत्र न्यायाधीश राजेंद्र सिंह ने कहा कि स्वर्गीय सागर सिंह केवल अधिवक्ता ही नहीं, बल्कि उनका जीवन आध्यात्मिक एवं राजनैतिक भी रहा। वह किसी तपस्वी से कम नहीं थे।

कार्यक्रम संयोजक एवं जिला शासकीय अधिवक्ता शशिशंकर सिंह ने कहा कि बाबू सागर सिंह व्यतित्व के धनी थे। ऐसे व्यक्तत्वि के धनी सदियों में गिने चुने पैदा होते हैं। वह कम उम्र से ही स्वाधीनता आंदोलन में बड़ी जिम्मेदारियों का निर्वह्न किए। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी पेंशन लेने से इंकार करते हुए कहा था कि अपनी मातृभूमि के सेवा का कोई मूल्य ग्रहण नहीं कर सकता यह मेरा फर्ज था।

कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी अंबर रावत, अरविंद यादव, मुन्ना प्रसाद, अमित यादव, योगेश द्विवेदी, बृजेश यादव, विभांशु सुधीर के साथ ही अधिवक्ता मुरलीधर सिंह, सूर्यनाथ सिंह, राजेंद्र तिवारी, रणधीर सिंह, सदानंद सिंह, अशोक सिंह, कामेश्वर मिश्रा, राकेशरत्न तिवारी, शिवराज सिंह, कामता प्रसाद यादव, रामकृष्ण यादव, धनंजय सिंह, जन्मेजय सिंह, शफीक अहमद, राजेश दीक्षित, जय प्रकाश दुबे, मनोज सिंह, मनोज दुबे, राम बहादुर भारती आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता नन्दलाल और संचालन दरोगा सिंह एडवोकेट ने किया।