चंदौली जिले में समाजवादी पार्टी के जमीनी नेता पूर्व सैनिक अंजनी सिंह ने देश के गरीब मेहनतकश भाइयों को अपने ही देश में प्रवासी मजदूर कहे जाने पर केंद्र व प्रदेश सरकार की जमकर आलोचना की है। श्री सिंह ने कहा कि लगता है भाजपा के लोग देश का संविधान तोड़ देना चाहते हैं। सत्ता के अहंकार में सरकार ने देश के संविधान एवं हर श्रमिक का अपमान किया है।

सवाल किया कि अपने ही देश के भीतर कोई प्रवासी कहा जाएगा क्या? भारत के हर राज्य को अलग देश बनाना चाहती है सरकार क्या? भारत के राज्य भारत सरकार के अधीन नहीं क्या? प्रधानमंत्री जी को भी प्रवासी सांसद कहेगी क्या? भाजपा देश के गरीब श्रमिक भाइयों को प्रवासी कहने की मैं कड़ी से कड़ी निंदा करता हूँ। साथ ही आदरणीय प्रधानमंत्री जी सहित मीडिया एवं विपक्ष के लोगों से भी अपील करता हूँ कि प्रवासी कहना बंद हो। देश के भीतर कोई भी व्यक्ति कहीं जा आ सकता है।रोजगार कर सकता है।पूरा भारत एक है और सबका है मूलतः विदेशों में बसे भारतीय भाइयों के लिऐ ही यह शब्द प्रयुक्त है।समाजवादी नेता ने यह भी कहा कि लाकडाउन के दौरान एक शब्द और बोला गया सोशल डिस्टेंसिंग अर्थात सामाजिक दूरी जबकि फिजिकल डिस्टेंसिंग यानी व्यक्तिगत दूरी ही कोरोना से बचने का कारगर उपाय है।

भारत वर्षों पहले से सामाजिक दूरी का शिकार है।हमारे दलित पिछड़े भाइयों को मंदिर नहीं जाने दिया गया,ऊँच नीच कहकर सामाजिक दूरी रखी गई।अल्पसंख्यक समुदाय से भी धार्मिक दूरी की गई जिसका खामियाजा आज देश जातियों धर्मों में विभाजित होकर जी रहा है। जरूरत है लोगों को जोड़कर साथ चलने की है। भारत को मजबूत बनाने की अंजनी सिंह ने भारत सरकार से अपील किया कि देश के भीतर में प्रवासी शब्द कहना बंद किया जाय।सरकार पहल कर सुधार करें।