कोरोना काल में जन समुदाय को जागरूक करने में अहम भूमिका निभा रहीं आशा कार्यकर्ता

चंदौली जिले में स्वास्थ्य से जुड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों में फ्रंट लाइन कार्यकर्ता का जन सामुदायिक से सीधा संपर्क व संवाद होता है। इसी के मद्देनजर कुछ दिवस पूर्व स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान और यूनिसेफ, उत्तर प्रदेश तकनीकी सहयोग इकाई (यूपी टीएसयू) व सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के सहयोग से आशा, आशा संगिनी व एएनएम को कोविड-19 काल में स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने और कोविड के नियमों का पालन करने के लिए वर्चुअल कार्यशाला आयोजित की गई थी जिसका फ्रंट लाइन कार्यकर्ताओं के साथ ही साथ जन समुदाय में भी देखने को मिल रहा है ।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन चंदौली के जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबन्धक (डीसीपीएम) सुधीर कुमार राय ने बताया कि इस प्रशिक्षण के बाद आशा, एएनएम कोविड-19 के नियमों को ध्यान में रखते हुये ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी), गृह आधारित नवजात देखभाल (एचबीएनसी), परिवार नियोजन कार्यक्रम, टीकाकरण सहित समस्त स्वास्थ्य सेवायें दे रही हैं साथ ही साथ कोविड-19 नियमों की पूर्ण जानकारी भी दे रही हैं । सरकार द्वारा दिये गए संदेश ‘जब तक दवाई नहीं – तब तक कोई ढिलाइ नहीं’ को अमल कर सामुदायिक गतिविधियां की जा रही हैं ।

ब्लॉक धानापुर उपकेंद्र आवाजापुर गाँव रमेरपुर की आशा कार्यकर्ता संगीता सिंह ने बताया कि कोविड-19 के प्रारंभ से लगभग 200 घरों के सर्वे के दौरान लोगों को घरों में रहने, गुनगुना पानी पीने, बार-बार हाथ धोने और मास्क लगाने आदि एहतियात बरतने की जानकारी दी लेकिन अब जब स्थितियां समान्य हो रही हैं जिसके कारण स्वयं और दूसरों को सुरक्षित रखने के लिए 1 अक्टूबर 2020 को हुयी कार्यशाला में बहुत सी सावधानियों के बारे में पता चला। उन्होने बताया कि इस गाँव की आबादी 1282 है और एक अक्टूबर से आज तक 189 से ज्यादा घरों में भ्रमण कर चुकी हैं। उन्होने बताया कि वह गाँव के घरों में जाकर कोविड के नियमों व टीकाकरण, परिवार नियोजन कार्यक्रम आदि की विस्तृत जानकारी दे रहीं हैं । जब से लॉकडाउन शुरू हुआ उस दौरान गर्भवती को आयरन की गोली देना, सुरक्षित प्रसव करना, प्रवासी मज़दूरों का सर्वे व थर्मल स्क्रीनिंग के साथ-साथ अन्य बीमारियों का सर्वे व सुविधाएं उपलब्ध प्रदान की हैं ।

संगीता बताती हैं कि वर्चुअल कार्यशाला से और भी बहुत सी जानकारी प्राप्त हुईं । जैसे गृह भृमण के दौरान किसी भी वस्तु, दरवाजे की कुंडी को न छूना, छूने के बाद हाथों को तुरंत सैनिटाइज करना, साफ-सफाई का विशेष ध्यान देना आदि । उन्होने बताया कि महिलाएं ही घर की साफ सफाई व पति, बच्चों एवं परिवार अन्य सदस्यों की देखरेख करती हैं इसलिए महिलाओं को कोरोना काल में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए । भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जानें से बचें, किसी से बात करते समय उचित दूरी बनाकर रखें, बात करते समय मास्क जरूर लगाएं और अगर साथ वाले ने मास्क का प्रयोग नहीं किया हो तो मास्क का इस्तेमाल या रुमाल, गमछा का प्रयोग करें । इसके साथ ही संचारी रोग मलेरिया, डेंगू आदि के लक्षण व उपचार की जानकारी दे रही हैं ।

ब्लॉक चकिया गाँव बरौसी की आशा निराशा पटेल बताती हैं कि कार्यशाला में कोरोना महामारी से बचाव के लिए मास्क का उपयोग करना, एक दूसरे से दो गज की दूरी, बार- बार साबुन-पानी से 40 सेकेंड तक हाथ धोने तथा लोगों को जागरूक व कोरोना संक्रमण के दौरान ज्यादा सावधानी बरतनें की जानकारी दी गई । उन्होने बताया कि इस गाँव की आबादी 1058 है और एक अक्टूबर से आज तक 225 से ज्यादा घरों में भ्रमण कर चुकी हैं। इस दौरान कोरोना से बचाव के लिए सभी नियमों की जानकारी दी । किसी भी महिला, पुरुष व बच्चों को अस्वस्थ्य महसूस होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाने की सलाह दी । खाँसते या छीकते समय नाक और मुंह को रुमाल से डक कर रखें व किसी के भी सम्पर्क में न आयें ।

आरोग्य सेतु एप की जानकारी व एप डाउनलोड कराने व एप की विशेषता की जानकारी दी । साथ ही गर्भवती को किसी भी परेशानी के लिए 102 एम्बुलेंस पर फोन और यदि गर्भवती कोरोना से संक्रमित है तो 108 पर फोन करने की जानकारी दे रहीं हैं । उन्होने कहा कि जिस तरह से हम सभी ने पोलियो को ख़त्म किया ठीक उसी तरह कोरोना को हम सब मिलकर खत्म करेगें ।