कोरोना काल में मां भी मास्क पहनकर ही बच्चों को कराए ‘स्तनपान’

चंदौली जिले में भी विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। प्रत्येक वर्ष अगस्त के प्रथम सप्ताह में इसे मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य समुदाय में स्तनपान के प्रति जागरूकता पैदा करना और बढ़ावा देना है।

इसमें प्रायः तीन बिन्दुओं पर ज़ोर देना है, पहला -नवजात को जन्म के एक घंटे के अंदर माँ का पहला गाढ़ा दूध पिलाना, दूसरा – जन्म से छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलाना और तीसरा – छह माह से दो साल या उससे अधिक स्तनपान के साथ पूरक आहार देना है।

इसी के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग (आईसीडीएस) के तहत अग्रिम पंक्ति की कार्यकर्ता एएनएम, आशा, संगिनी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जनसमुदाय को कोविड-19 के बचाव एवं नियमों को ध्यान में रखते हुये जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।

आईसीडीएस विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती नीलम मेहता ने बताया कि अभियान के दौरान कोविड-19 की सावधानियों और नियमों को ध्यान में रखते हुये आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा माताओं को घर-घर जाकर बताया जा रहा है कि नवजात के लिए मां का दूध अमृत के समान है यदि नवजात को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान शुरू करा दिया जाए तो उस नवजात की आयु बढ़ जाती है और शारीरिक और मानसिक विकास भी तेजी से होता है।

इसके साथ ही जनसमुदाय को छह माह तक सिर्फ माँ का दूध, छह माह के पश्चात माँ के दूध के अलावा ऊपरी आहार की शुरुआत आवश्यक रूप से करना आदि के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

यूनिसेफ से वाराणसी मण्डल के मंडलीय समन्वयक अंजनी राय ने बताया कि अभियान में ऊपरी आहार के महत्व के बारे में परिवार को ‘ऊपरी आहार पुस्तिका’ के साथ उसके माध्यम से जानकारी देना, ऊपरी आहार पर दिये गए मॉड्यूल या चित्र के इत्यादि के माध्यम से जानकारी देना, बच्चों को खिलाने वाले बर्तन इत्यादि कटोरी चम्मच को घर वालों से मांग कर परिवार वालों को सीखना और परामर्श देना, घर पर बने हुये भोजन को आंगनबाड़ी अपने सामने मंगाकर बच्चों को खिलाना आदि इन सभी के बारे में जानकारी देना।

इस दौरान परिवार वालों खासतौर पर माताओं को कोविड-19 संक्रमण से बचाव जैसे स्तनपान कराते समय नाक और मुंह को ढककर रखना, हाथों और स्तनों को अच्छी तरह से सेनिटाइज़ करना, कटोरी-चम्मच को अच्छी तरह से धोकर उपयोग में लाना आदि।

धानापुर एवं चहनियाँ ब्लॉक की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि कोरोना काल के दौरान सभी सावधानियों और नियमों का पालन करते हुये माताओं और उनके परिवार को जागरूक किया जा रहा है। लोगों को बताया जा रहा है कि माँ का दूध नवजात के शारीरिक तथा मानसिक विकास के साथ ही डायरिया, निमोनिया एवं कुपोषण से भी बचाता है। दो वर्ष तक उसके बाद भी स्तनपान जारी रखने से शिशु उच्च गुणवत्ता वाली ऊर्जा एवं पोषण तत्व प्राप्त करता है।

स्तनपान कराने से भूख एवं कुपोषण की रोकथाम में मदद मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें स्तनपान से जुड़े चित्रों, पुस्तकों और विभिन्न संदेशों आदि के माध्यम से जानकारी प्राप्त हो रही है और सभी का अच्छे से पालन भी किया जा रहा है। साथ ही स्तनपान के दौरान नाक और मुंह को ढककर रखने की सलाह दी जा रही है और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान रखने को कहा जा रहा है।

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