महिलाओं ने सबसे अधिक बार संभाली है जिला पंचायत की कुर्सी, निर्विरोध भी हुआ है चुनाव

चंदौली जिले में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर चार बार महिलाओं का कब्जा रहा है। दो बार पुरूष को मौका मिला। पद अनारक्षित होने पर भी महिलाएं जीतती रही हैं। शासन ने इस बार पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया है। हालांकि अबकी बार भी इस वर्ग महिला उम्मीदवार भी चुनाव में दाव आजमा सकतीं हैं।

सुषमा पटेल को पदेन अध्यक्ष

वाराणसी से अलग होकर चंदौली को 1997 में नए जनपद का दर्जा मिला था। सुषमा पटेल को पदेन अध्यक्ष चुना गया था। वे लगभग तीन साल तक जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं।

पूनम सोनकर निर्विरोध निर्वाचित

इसके बाद जब सन् 2000 में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हुआ तो इस दौरान पद अनुसूचित महिला के लिए आरक्षित था। यहां पर पूनम सोनकर निर्विरोध निर्वाचित हुई थीं।

छत्रबली सिंह ने किया था तख्तापलट

2005 में सपा समर्थित अमलावती यादव चुनाव जीती थीं, लेकिन कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं। 2008 में सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद छत्रबली सिंह के नेतृत्व में जिला पंचायत सदस्यों ने उलटफेर कर दिया। सदस्यों का समर्थन खोने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा और छत्रबली सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बने। इसके बाद सन् 2010 में हुए जिला पंचायत के चुनाव के बाद छत्रबली सिंह दोबारा जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए और अपना कार्यकाल पूरा किया था।

छीना रामकिशुन के बेटे का सपना

फिर 2015 के चुनाव में एक नाटकीय घटनाक्रम में उनकी पत्नी सरिता सिंह सपा के समर्थन से जिला पंचायत अध्यक्ष बनने में कामयाब रहीं। उन्होंने कांटे की टक्कर में विधायक सुशील सिंह की पत्नी व वाराणसी की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष किरन सिंह को हराकर कुर्सी पर कब्जा जमाया था। इतना ही पूर्व सांसद रामकिशुन यादव के बेटे को मिला टिकट सरिता सिंह के हाथों में चला गया था।

इस अब तक चार बार जिला पंचायत की कुर्सी महिलाओं के हवाले रही। वहीं दो बार छत्रबली सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। इस बार शासन ने पद को अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया है। हालांकि पिछड़ा वर्ग के भी उम्मीदवारों की कमी नहीं हैं। पिछले काफी दिनों से जिले के सबसे बड़े पद पर काबिज होने का ख्वाब देख रहे संभावित उम्मीदवार आरक्षण होने से गदगद हैं। वहीं महिलाएं इस बार भी अपनी दावेदारी पेश कर सकती हैं।

जिले में हैं 35 सीटें

जिले में जिला पंचायत की कुल 35 सीटें हैं। जिसके पास अधिक सदस्यों का समर्थन रहेगा, वही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होगा। ऐसे में अध्यक्ष के संभावित उम्मीदवारों की नजर सदस्यों पर टिकी हुई है। कोशिश कर रहे हैं कि उनके पाले में रहने वाले अधिक से अधिक सदस्य चुनाव जीतें, ताकि निर्वाचन के दौरान किसी तरह की मुश्किल न आने पाए।