चंदौली जिले के चकिया कोतवाली के शेरपुर गांव से से जहां पुलिस के ढुलमुल रवैये के कारण दो समुदाय आमने सामने हो गये हैं, वहीं एकबार फिर से पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा है। इसके कारण भड़की हिंसा पर काबू पाने के लिए एडिशनल एसपी नक्सल वीरेन्द्र यादव, सीओ नीरज पटेल सहित चार थानों की पुलिस को मशक्कत करना पड़ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चकिया कोतवाली क्षेत्र के शेरपुर में मंगलवार की दोपहर के समय एक युवती के साथ छेड़खानी कर दी गयी थी। परिवार के लोगों को जब युवती ने उक्त प्रकरण को बताया तो परिवार के लोग आगबबूला होकर छेड़खानी करने वाले युवक को पीट दिया। इसकी सूचना पर पहुंची पुलिस ने बिना किसी मुकदमा के दोनों पक्षों को छोड़ दिया गया।

उक्त प्रकरण के बाद छेड़खानी करने वाला युवक रामनगर वाराणसी से कुछ लोगों को बुलाकर लड़की वालों पर अचानक लाठी डंडे और धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिसमें आधा दर्जन से अधिक लोगों को चोटें आयीं। जिसके बाद लोग सड़क पर उतर आये और हंगामा करना शुरु कर दिया। इसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गयी और लोग गाड़ियों में तोड़फोड़ मचाने लगे।

उक्त सूचना के बाद आनन फानन में पुलिस द्वारा कंट्रोल करते हुए शांति व्यवस्था कायम करने के लिए चार थानों की पुलिस बुला कर स्थिति पर नियंत्रण करने की कोशिश की और घायलों को इलाज के लिए संयुक्त चिकित्सालय चकिया ले गयी। रात में तीन बजे गंभीर रूप से घायलों को वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया। इसके बाद पीड़ित पक्ष से मुकदमा लिखवाने का दबाव बनाया जाने लगा।

उक्त घटना क्रम एक बार फिर से चंदौली पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाता है और विभिन्न सवालों को जन्म देता है…

1.. मारपीट व छेड़खानी के मामले को पुलिस गंभीरता से क्यों नहीं लेती है ?

2.. सरकार बेटियों की सुरक्षा के विषय में इतने बड़े बड़े दावे करती रहती है और कोतवाल जैसा जिम्मेदार छेड़खानी करने वालों को बिना कार्रवाई के क्यों छोड़ देते हैं..?

3.. जिले में इसके पहले भी हुए ऐसे मामलों के बाद पुलिस सबक क्यों नहीं लेती है…?

इतने के बाद भी पुलिस इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर रही है और विभागीय लोगों की पोल खुलने की डर से चुप्पी साधे है। जब पुलिस के आला अधिकारियों के संज्ञान में मामला आ गया है तो सारी सच्चाई क्यों नहीं बतायी जा रही है और इस मामले पर आला अधिकारी की चुप्पी भी सवाल खड़े कर रही है। ऐसे तो हर छोटे बड़े मामले पर फोटो व बयान जारी कर दिए जाते हैं और लोगों से तरह तरह की अपील की जाती है। पर इस मामले को क्यों दबाया जा रहा है।