अब चंदौली के घोटालेबाज प्रधानों की खैर नहीं, कमिश्नर ने इसलिए मांगी है सूची

कांसेप्ट फोटो

चंदौली जिले के गांवों में विकास के नाम पर सरकार के लाखों रुपये डकारने वाले प्रधानों की अब खैर नहीं है। ऐसे प्रधानों को आगामी चुनावों में दावेदारी का रास्ता भी कठिन हो सकता है। मामले में वाराणसी मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने ग्राम्य विभाग के अफसरों से भ्रष्टाचार में लिप्त या जांच प्रक्रिया से गुजर रहे प्रधानों की सूची तलब की है। अधिकारी सूची बनाने की तैयारी में जुट गये हैं।

जिले की सभी नौ ब्लाकों में कुल 734 ग्राम प्रधान निर्वाचित हैं। विकास कार्यों के लिए शासन की ओर से ग्राम सभाओं को प्रति वर्ष लाखों रुपये आवंटित किए जाते हैं। जिससे गांवों में आवास, शौचालय, सीसी रोड, नाली निर्माण, मनरेगा से विकास कार्य कराए जाते है। लेकिन कुछ ऐसे भी ग्राम प्रधान निर्वाचित है जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच चल रही है।

 पंचायतीराज विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जांच प्रक्रिया से चार दर्जन से अधिक प्रधान और पंचायत सचिव गुजर रहे है। इसमें आधा दर्जन प्रधानों का वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज हो चुका है। लेकिन फाइनल जांच अभी बाकि है। उधर मंडालयुक्त भी भ्रष्टाचार में लिप्त या जांच प्रक्रिया से गुजर रहे प्रधानों की जानकारी लेने के लिए ग्राम्य विकास विभाग के अफसरों को पत्र भेजा है। 

सीडीओ ने पंचायतीराज अधिकारी ब्रह्मचारी दुबे को पत्र भेजकर ऐसे प्रधानों की सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके बाद सूची को उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। चंदौली के सीडीओ ने कहा है कि मंडालायुक्त वाराणसी की ओर से भ्रष्टाचार में लिप्त या जांच प्रक्रिया से गुजर रहे प्रधानों की सूची मांगी गई है। पंचायतीराज अधिकारी को जल्द सूची भेजने का निर्देश दिया गया। इसके बाद सूची को मंडलायुक्त को भेजा जाएगा।