भारत निर्वाचन आयोग ने सभी चुनाव लड़ने वाले नेताओं के लिए एक काम अनिवार्य कर दिया है। अब आपके इलाके से चुनाव लड़ने वाले नेता को निर्वाचन से पहले इसे खुद के खर्चे पर एक सार्वजनिक विज्ञापन जारी करके अपने अपराध का लेखा जोखा देना होगा।

बाकायदा इसके लिए सर्वाधिक प्रसार या पढ़े जाने वाले दो समाचार पत्रों में विज्ञापन छपवाना होगा, जिससे मतदाताओं को अपने प्रत्याशी को जानने का मौका मिलेगा। यही नहीं नामांकन पत्र के साथ शपथ पत्र में एक-एक प्रकरण की पूरी जानकारी देनी होगी। आयोग ने इसके लिए निर्वाचन विभाग को निर्देश दिए हैं।

लोकतंत्र में सत्ता को अपराधीकरण से बचाने के लिए आयोग ने इस बार प्रत्याशियों के नामांकन की व्यवस्था में फेरबदल किया है। अभी तक चुनाव लड़ने पर प्रत्याशी नामांकन पत्र के साथ शपथ-पत्र में खुद पर दर्ज आपराधिक प्रकरणों एवं विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन वादों का संक्षिप्त विवरण अंकित कर काम चला लिया करते थे, लेकिन अबकी चुनाव में उम्मीदवारी से पहले आपराधिक प्रकरणों और न्यायालय में विचाराधीन वादों का एक-एक कर पूरा विवरण सार्वजनिक तौर पर प्रकाशित कराना होगा।

अब अपने सार्वजनिक प्रकाशन से प्रत्याशी किसी भी प्रकरण को छिपा नहीं पाएंगे और यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि कुछ छिपाया गया है तो वह आपत्ति भी दर्ज करा सकेगा। इसके बाद उम्मीदवार पर कार्रवाई भी होना तय है। 

फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन हर हाल में कराया जाएगा।