चंदौली जिले के रहने वाले और दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों को रोजगार करने के लिए बैंकों की ओर से ऋण उपलब्ध कराया जाने वाला है। ताकि, सभी प्रवासी अपने गांव घर में ही दर्जी, बेल्डर, मैकेनिक, ब्रेकरी आदि जैसे स्वरोजगार शुरू कर सकें। प्रदेश सरकार की इस योजना पर सरकारी अफसर फोकस कर रहे हैं।

स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रवासी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्वरोजगार योजना के तहत आवेदन के साथ ही प्रोजेक्ट बना कर जमा करना होगा। प्रोजेक्ट के आधार पर ही प्रवासियों को एक लाख से दस लाख रुपये तक का ऋण दिया जाएगा।

कोराना संक्रमण के दौरान हुए लॉक डाउन के दौरान जिले में गैर प्रांतों से लगभग 13 हजार से अधिक लोग गैर प्रांतों से रोजगार और नौकरी छोड़कर जिले में आए है। ऐसे लोगों को योग्यता के अनुसार नौकरी उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन की विभिन्न कंपनियों से वार्ता चल रही है। लेकिन स्वरोजगार के लिए इच्छुक प्रवासियों को पंडित दीनदयाल स्वरोजगार योजना के तहत ऋण देने का भी अभियान चलाया जा रहा है।

इस योजना के तहत अनुसूचित जाति व जनजाति प्रवासियों को राष्ट्रीयकृत बैंक से पांच लाख से दस लाख तक का ऋण दिया जा रहा है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को दस हजार का अनुदान भी दिया जाएगा। साथ ही संपूर्ण ऋण से 25 फीसद मार्जिन मनी दी जाएगी।

अभ्यर्थियों को किराना, रेडीमेड, भैंस पालन, कपड़ा दुकान, फल व कापी, आटा चक्की, टेलरिग, मशाला उत्पादन आदि के व्यवसाय के लिए बैंक के माध्यम से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए प्रवासियों द्वारा राष्ट्रीयकृत बैकों में 100 से अधिक आवेदन जमा किए जा चुके हैं।

चंदौली जिले में स्वरोजगार करने के लिए इच्छुक लोगों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण देने की योजना है। इसके पीछे अकुशल मजदूरों को कुशल बनाने पर जोर है। इसके लिए आरसेटी, स्वरोजगार, उद्यम विभाग को जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा रोजगार सहायता केंद्र को भी कंपनियों से वार्ता करके बेरोजगारों को नौकरी दिलाने की जिम्मेदारी है।

उद्योग उपायुक्त गौरव श्रीवास्तव का कहना है कि पंडित दीनदयाल योजना के तहत कोई भी व्यक्ति स्वरोजगार लगाने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए उसे प्रोजक्ट बनाकर प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद बैंकों के माध्यम से संबंधित को रोजगार दिलाने के लिए ऋण मुहैया कराया जाएगा।