चंदौली  जिले में ही नहीं पूरे विश्व में डॉक्टर्स जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे मरीजों का न सिर्फ इलाज करते हैं, बल्कि उन्हें एक नया जीवन भी देते हैं। इसलिए उन्हें धरती पर भगवान का रूप कहा जाता है। वह कई लोगों को उनकी जिंदगी वापस लौटाते हैं। डॉक्टरों के समर्पण और ईमानदारी के प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए हर साल एक जुलाई को National Doctor’s Day मनाया जाता है।

एक ओर जहां लॉकडाउन के बाद सभी सुविधाएं स्थगित कर दी गयी तो वहीं दूसरी ओर डाक्टर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की जांच, सर्वे, स्क्रीनिंग आदि कार्य करते हुये कोरोना से जंग लड़ते रहे। डॉक्टरों ने स्वस्थ समाज का जिम्मा उठाया है और वर्तमान में भी वह अपना कर्तव्य बखूबी निभा रहे हैं। आइये जानते हैं कुछ ऐसे ही डाक्टरों के के बारे में।

नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शिकारगंज ब्लॉक चकिया के प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ सुधीर मिश्रा लॉकडाउन के आदेश से ही स्वास्थ्य केंद्र पर 24 घण्टे की इमरजेन्सी ड्यूटी और मोबाइल थर्मल स्कैनिंग, स्टाफ टीम के साथ फील्ड सर्वे में लगे हुये हैं। डॉ सुधीर ने बताया कि माता पिता और पत्नी के साथ पांच वर्षीय बेटी भी है। कोरोना के दर से बच्ची को गोद नहीं ले रहे हैं और शायद अभी कुछ महीने और दूर रहना होगा। फील्ड में सर्वे आदि का कार्य कर घर पर आते ही खुद को सेनेटाईज़ करते हैं। सुबह सात बजे घर से निकलते समय साथ पानी लेकर जाते है। खाने मे प्रोटीन युक्त आहार ज्यादा लेते है काढा बना कर प्रति दिन परिवार के सभी लोग पीते हैं।

डॉ सुधीर ने कहा कि चकिया में तीन हॉट स्पॉट सेंटर बना गये हैं, जहां संक्रमित व्यक्ति के पूरे परिवार और आसपास के सभी घरों की स्पेलिंग की गई!लाॅक डाउन से अभी तक पूरी माइक्रो प्लान के तहत ब्लाक के हर क्षेत्र में प्रति दिन स्क्रीन की जा रही है। अनलॉक मे बाहर से आये लोगों, साथ ही स्थानीय लोगों की भी स्क्रीनिंग करना होता है।

डॉ सुधीर ने बताया कि चकिया ब्लाक की आबादी 1.94 लाख है जिसमें हॉट स्पॉट बने भीषमपूर मे थर्मल स्क्रीनिंग 6,136 लोगों की गई, पिपरिया ब्लाक हॉट स्पॉट क्षेत्र में 1080 लोगों की स्क्रीनिंग गई और खुदरा ब्लाक बने हॉट स्पॉट क्षेत्र में 676 ग्रामीण लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की गयी। डॉ सुधीर ने कहा संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। लोगों को जागरूक रहने की जरूरत है। लोगों से दूरी बना कर रहे तो संक्रमण से दूर रहेंगे। मास्क का प्रयोग अतिआवश्यक है। यह बात समझाना होगा कि कोरोना से जीते जब मास्क पहनेंगे तब।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बरहनी के अंतर्गत अतिरिक्त पीएचसी की कामना को प्रभारी चिकित्साधीक्षक डॉ रितेश कुमार ने बताया कि लॉकडाउन के पहले दिन से चार ब्लाक की सर्वे के निरीक्षण कि जिम्मेदारी उनके नेतृत्व में ट्रेनिंग स्टाफ टीम द्वारा की जा रही है। लॉकडाउन के बाद घर और बाहर दोनों ही स्थितियों मे खुद की घर की और सबसे ज्यादा जानता के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखना। उन्होने बताया कि घर में 70 वर्षीय माँ, दो बच्चे और पत्नी है। घर वालों के साथ बैठे तीन महीने हो गये। कई दिन तो देर रात आने पर खुद को सेंनाटाइज करना बहुत मुश्किल होता था। हम जोखिम उठा रहे है लेकिन परिवार, समाज को सुरक्षित रखना भी बहुत जरूरी है। इमरजेन्सी में ड्यूटी की कोई टाईम नहीं होता है। कोविड की वज़ह से बहुत बदलाव आया है। पीएचसी से घर आने के बाद बाहर ही सेनेटाइज करना, कपडों को वहीं साफ़ करना, कम कपड़ों का प्रयोग करना, प्लास्टिक के जूते का इस्तेमाल करना आदि प्रतिदिन साफ करना होता है।

डॉ रितेश ने बताया कि हॉट स्पॉट एरिया में रह रहे लोगों मे डर है। डॉक्टर न सिर्फ सैंपल, स्क्रीनिंग कर रहे हैं बल्कि मानसिक तौर पर मजबूत और इससे बचने की जानकारी, सफाई और प्रोटीन युक्त आहार लेने की सलाह भी दे रहे हैं। चार ब्लाक क्षेत्र में 20 हॉट स्पॉट एरिया हैं। ब्लाक की आबादी कुल 2.13 लाख है। अब तक संस्थागत स्क्रीनिंग की संख्या 5,412 के साथ ही हॉट स्पॉट एरिया में की गयी स्क्रीनिंग की संख्या 3,854 है। उन्होने कहा कि लोगों से दो गज की दूरी बना कर रहें, बाहर निकलने पर मास्क पहनकर रखें, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खानपान पर विशेष ध्यान दें। गांव के लोग बचाव एवं सावधानियां बरतेंगे तो संक्रमण से मुक्त एवं सुरक्षित रहेंगे।