धान क्रय केंद्र तो खुल गया पर नहीं हो पा रहा है किसानों का पंजीकरण, साहब करिए उपाय

चंदौली जिले में धान क्रय केंद्र खुलने लगे हैं। इसके साथ ही किसानों की पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू है लेकिन बहुत से किसानों का नेटवर्क की समस्या और जानकारी के अभाव में पंजीकरण नहीं हो पाया है। जिससे किसान परेशान हैं।

आपको बता दें कि जिले में धान की खरीद करने के लिए 64 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। क्रय केंद्र तो खुले, लेकिन किसान नहीं आ रहे हैं। वहीं जहां केंद्र नहीं खुले हैं वहां किसान पंजीकरण के लिए परेशान हो रहे हैं।

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए केंद्र प्रभारी व कर्मियों ने सैनिटाइज की व्यवस्था किसानों के लिए कर रखी है। पिछले वर्ष धान की खरीद किए जाने का निर्देश एक नवंबर से किया गया था, लेकिन इस बार 15 अक्टूबर धान खरीद किए जाने का आदेश जारी किया गया। वही क्रय केंद्रों पर किसान धान लेकर नहीं पहुंच रहे हैं क्योंकि अभी उनकी फसलों को पकने में देर है।

जिला मुख्यालय स्थित कृषि मंडी परिसर में सात केंद्र खोले गए हैं जहां शुक्रवार को सभी केंद्र खुले थे लेकिन किसान नहीं आए।

जिले में इस बार जनपद में पीसीएफ के आठ, यूपी एग्रो के नौ, नैफेड के 10, एनसीसीएफ के 15, पीसीयू के 12 व मंडी समिति का एक क्रय केंद्र खोला गया है। खाद्य व विपणन विभाग समेत अन्य एजेंसियां भी अपना क्रय केंद्र खोलेंगी। नगरों व कस्बों के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी क्रय केंद्र खुलें है ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर न जाना पड़े।

कहा जा रहा है कि इस बार मौसम ने साथ दिया है। ऐसे में धान के कटोरे में बेहतर उत्पादन की उम्मीद है। इसको देखते हुए विभाग ने लक्ष्य बढ़ाकर 1.95 लाख एमटी कर दिया है। जबकि पहले 1.83 लाख एमटी लक्ष्य निर्धारित किया गया था। सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1868 रुपये प्रति क्विटल लागू किया है। क्रय केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों को एमएसपी के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा। इस बार सरकार छनाई व पल्लेदारी के नाम पर मिलने वाले 20 रुपये प्रति क्विटल नहीं देगी। गत वर्षों में किसानों के खाते में यह धनराशि भेजी जाती थी।

क्रय केंद्रों पर धान बिक्री 3978 किसानों ने अपना पंजीकरण कराया है। सदर तहसील में 2067, चकिया 1100, सकलडीहा 697, मुगलसराय 66 व नौगढ़ के 48 किसानों ने आनलाइन पंजीकरण कराया है। जबकि किसानों के 8443 गाटा का सत्यापन अभी लंबित है। सत्यापन पूरा होने के बाद पंजीकरण कराने वालों किसानों की संख्या बढ़ेगी। किसानों की माने तो आनलाइन रजिस्ट्रेशन में परेशानी हो रही है। पर किसान सहज जनसेवा केंद्रों से अपना पंजीकरण करा सकते हैं।