CMO ऑफिस में भर्ती से अनजान है नए व पुराने साहब, जांच के लिए करते रहिए इंतजार

चंदौली जिले में सीएमओ कार्यालय के माध्यम से हुई संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति पर एक के बाद एक रहस्यों का खुलासा होता जा रहा है।  वही इस सारी प्रक्रिया से तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले अपनी अनभिज्ञता जताते हुए मामले से पल्ला झाड़ते हुए नजर आए।

बताते चलें कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत संविदा कर्मचारियों के लिए नियुक्ति के विज्ञापन पर 31 मार्च 2020 तक की सेवा प्रदान करने के लिए आवेदन मांगा गया था । कोविड कॉल होने के कारण इस पर नियुक्ति नहीं हुई तो विभाग द्वारा पूर्व के जिलाधिकारी द्वारा इसी प्रकार का अनुमोदन न मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी से अनुमोदन लेने के बाद अवधि समाप्त होने के बावजूद भी बिना विज्ञापन कराए पुरानी ही विज्ञापन के आधार पर स्वास्थ विभाग द्वारा सारी नियुक्तियां पूर्ण कर ली गई।

जबकि आयुष्मान मित्र के पद का विज्ञापन बाद में प्रकाशित कर उसकी नियुक्ति प्रक्रिया को 9 फरवरी को पूर्ण किया गया। नियुक्ति समिति में जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी तथा मुख्य ट्रेजरी ऑफिसर के नेतृत्व में चयन प्रक्रिया कराई गई । लेकिन जल्दबाजी इतनी थी कि 30 को इंटरव्यू देर शाम चलने के बाद 30 ही जनवरी को रिजल्ट आनन-फानन में ओपन किया गया और सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बना ली गयी ।

यहाँ तक की डिस्पैच कर दिया गया और उस दिन जनपद में वीवीआईपी के आगमन के कारण जिला अधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी अति व्यस्त भी नजर आए थे। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या इस चयन प्रक्रिया को 30 जनवरी २०२१ तक पूर्ण कर रिजल्ट और डिस्पैच लेटर जारी करने के लिए कार्यालय को क्या देर रात भी खोल कर कार्य किया गया ।

वही इस संबंध में जब वार्ता हुई तो संबंधित पटल के बाबू ने बताया कि सारी मानक को पूर्ण करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया की गई है और डिस्पैच की कार्यवाही करने के साथ ही साथ 30 जनवरी तारीख को अभियुक्तों को मेल के माध्यम से नियुक्ति पत्र दिया गया ।

जबकि अनुबंध पत्र के संबंध में उन्होंने बताया कि अनुबंध पत्र बनने के बाद नियुक्ति पत्र जारी किया गया और अभ्यर्थियों द्वारा नियुक्त अपने स्थानों पर जाकर 1 से 4 फ़रवरी २०२१ के बीच में पद ग्रहण किया गया । इसी बीच पूर्व मुख्य चिकित्साअधिकारी 31जनवरी को ही अपना कार्यभार अपर चिकित्साअधिकारी नीलम ओझा को देकर रवाना हो गए 4 फरवरी २०२१ को नए साहब ने कार्यभार ग्रहण किया

इस संबंध में अभियुक्तों द्वारा यह भी बताया गया कि कहीं न कहीं इस चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर विशेष बल नहीं दिया गया है इसके कारण या तो पहले से ही चयनित व्यक्ति अपना अनुबंध पत्र बनाकर रखते थे या नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद अनुबंध पत्र साइन हुआ होगा।

इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी बीपी द्विवेदी से वार्ता हुई तो उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया मेरे चार्ज लेने के पूर्व की गई है इसलिए इस संबंध में मुझे अभी किसी प्रकार की जानकारी नहीं है । जब जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक होगी तो इस संबंध में जानकारी प्राप्त कर आगे की कार्यवाही की जाएगी । एक तरफ पद पर आसीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी इस नियुक्ति प्रक्रिया पर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहें हैं ।

वहीं उन्होंने कहा कि जिनके कार्यकाल में यह नियुक्ति की गई है और जिनके द्वारा ऐसे अभियुक्तों को ज्वाइन कराया गया है वह इसके जवाब देने के उत्तराधिकारी हैं  । अब ऐसे जवाब के बाद क्या इस प्रकार की गतिविधि पर कोई हल निकल सकता है या नियुक्ति प्रतिक्रिया में उठाने वाले सवाल खत्म हो सकते है। जब अधिकारी ही सारे मामले को नजर अंदाज करते नजर आ रहे है ।