चंदौली में सरकार के लाख प्रयास के बाद भी गरीबों को छत देने की योजना पर वन विभाग पानी फेर रहा है और जंगल की जमीन बताकर बनवासी लोगों पर ज्यादती कर रहा है। ताजा मामला नक्सल प्रभावित क्षेत्र के नौगढ़ थाने से जुड़ा है और यह हाल सांसद के आदर्श गाँव जरहर का है ।

वन विभाग जंगली जमीन की सुरक्षा के नाम पर वनवासी क्षेत्रो में रहने वाले गरीबों कहर ढा रहा है और घरों को उजाड़ने के साथ साथ वृध्द महिलाओं के ऊपर लाठियां चलाकर हैवानियत का परिचय दे रहा है। पीड़ित को पैरो पर चलने में भी मजबूर कर दिया है।

भाजपा सरकार जहां आम गरीब, दबे कुचले, बेसहारा लोगों को अपनी योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन यापन की स्थिति को सुधार कर उनको सभी सुविधाओं से युक्त करना चाहती है, लेकिन वन विभाग के कर्मचारी व अधिकारी कुछ अपनी निजी स्वार्थों के लिए अशिक्षित बेसहारा गरीब वनवासियों पर जंगली जमीन का हवाला देकर लगभग एक दर्जन मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बन रहे आवास को जेसीबी मशीन से जमीन दोज़ कर दे रहे हैं।

वहीं पुरुष और महिलाओं पर वर्दी का रौब दिखाते हुए निर्दयता पूर्वक डंडों से पिटाई कर जेसीबी मशीन से उन्हें दौड़ाया भी गया । असहाय गरीब यह वनवासी अपनी छत की आस लिए कितने सपने संजोए हुए थे जिन्हें वन विभाग के क्रूर अधिकारी एवं कर्मचारियों ने पल भर में उनके आंखों के सामने चकना चूर कर दिया ।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सारा वाकया सोनभद्र सांसद छोटेलाल खरवार के गोद लिए गए आदर्श गांव ज़रहर में हुआ और अभी तक इन बेसहारा गरीबों का दुख दर्द पूछने के लिए न तो यहां के प्रतिनिधि पहुंचे और ना ही कोई सरकारी अधिकारी तथा कर्मचारी।

पीड़ितों का कहना है कि हम लोग कई वर्षों से यहां बसे हैं और हमारे पूर्वज भी यही रहे यहां बिजली रास्ता सहित अन्य सुविधाएं हो गई हैं उसके बाद भी हम लोगों का अर्ध निर्मित मकान जेसीबी मशीन से जमींदोज कर दिया गया ,
सीधे-साधे अशिक्षित पीड़ितों की बात माने तो यह सब खेल मात्र उनको मिले हुए सरकारी पैसे की बंदरबांट के लिए हुआ है,वन विभाग को सुविधा शुल्क नहीं देने के कारण हुआ है।

पीड़ितों की माने तो यहां पूर्व में इंदिरा आवास जैसे और भी कई कच्चे पक्के आवास बने हैं उसके बाद भी हम लोगों के साथ इस तरह का उत्पीड़न किया जाता है सबसे बड़ी बात है कि इन आवासों को बनाने के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर से यह गरीब नदी से कंधों पर पानी ला करके इस पहाड़ी क्षेत्र में निर्माण करा रहे थे इनके पास पानी की भी सुविधा नहीं है उसके बाद भी वन विभाग के तानाशाह अधिकारी एवं कर्मचारी इन गरीबों के ऊपर जुल्म ढा रहे हैं ।

हालांकि, इस पूरे मामले पर वन विभाग व जिले के आला अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है वहीं क्षेत्र के स्थानीय विधायक शारदा प्रसाद व क्षेत्र पंचायत प्रमुख प्रतिनिधि सुजीत सिंह ने वन विभाग के इस कार्यवाही को क्रूरता पूर्वक कार्यवाही का संज्ञान देते हुए सुविधा शुल्क की मांग की बात को स्वीकार किया है वहीं भाजपा के चकिया विधान सभा के क्षेत्रीय विधायक सारदा प्रसाद ने मौके पर पहुंचकर घटना का संज्ञान लेते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने व वन विभाग पर कार्यवाही कराने की बात कही है।

वहीं सम्बन्ध में डीएफओ दिनेश खरे ने बताया कि जंगल की जमीन पर कब्जा करने के कारण उनका निर्मित आवास ध्वस्त कर दिया गया है ऐसे जितने लोग जंगल विभाग की जमीन पर कब्जा किये है उन सभी के खिलाफ बेदखली की कार्यवाही की जाएगी।