मोदीजी के बहाने सेवा सप्ताह में गंगा कटान के दर्द को भी शामिल कर लीजिए विधायक जी..!

 

चंदौली जिले के गंगा के तटवर्ती इलाके में गंगा के कटान के चलते कई गांव प्रभावित होते हैं और हर साल सैकड़ों एकड़ जमीन कट जाती है। पड़ाव से लेकर महुंजी गांव तक के किसानों व गंगा किनारे बसे लोगों का यही दर्द है, जिसके बाढ़ के समय नेता अफसर याद करते हैं फिर भूल जाते हैं। भले ही अब गंगा का जलस्तर घट गया है। लेकिन बाढ़ के दौरान गंगा की तल्ख धाराएं किसानों की कई एकड़ उपजाऊ भूमि बहा ले गई। तटवर्ती इलाके के दर्जनों गावों के किसान दशकों से गंगा कटान का दंश झेल रहे हैं। समय समय पर जनप्रतिनिधियों ने समस्या के समाधान निकालने का सब्जबाग दिखाया। लेकिन लंबे अंतराल के बाद भी अब तक किसी ने गंगा कटान से पीड़ित किसानों की कोई सुधि नहीं ली।

जिले ही नहीं देश भर मोदी जी के जन्मदिन पर सेवा सप्ताह मनाया जा रहा है, जिसमें लोगों की मदद की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि काश सत्ता पक्ष के नेता लोग मोदी जी के बहाने हमारा दर्द भी सुनते और उसके लिए योजना बनाते।नरौली गांव के सामने गंगा में बालू का कई एकड़ का रेत जमा हो गया है। जिसके नहीं हटने से गंगा की धाराएं गांव के नजदीक से बहने लगी है। जानकारों की माने तो यदि नरौली गांव के सामने नदी में जमा बालू का टीला नहीं हटा तो अब नौघरां गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। कमोबेश ऐसे ही हालात से रायपुर, नरौली, महमदपुर, मिश्रपुरा आदि अन्य गांव के किसान भी जूझ रहे हैं।

क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि गंगा कटान की समस्या को दूर कराने का वायदा कर कई नेताओं ने लोकसभा एवं विधानसभा में कुर्सी हथियाई। किसानों का कहना है कि कटान की इस भयानक त्रासदी से अकेले नौघरां और नरौली ही नहीं, क्षेत्र के दो दर्जन से ज्यादा गांव के लोग जूझ रहे हैं। जिनमें सहेपुर, रामपुर दीयां, प्रसहटा, हिंगुतर गढ़, बुद्धपुर, अमादपुर, मेढवा, नगवां, सोनहुली, कवलपुरा, प्रहलादपुर, गुरैनी, जिगना, बयानपुर, अवहीं, महुंजी आदि कई गांव शामिल हैं।

धानापुर विकास मंच के संयोजक गोविंद उपाध्याय, विद्यार्थी मंच के जिलाध्यक्ष प्रभात सिंह आदि ने पीएम सीएम से गंगा कटान की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग किया

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