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निर्जला एकादशी पर लोग लगा रहे हैं गंगा में डुबकी

tds_top_like_showtds_top_like_showtds_top_like_showtds_top_like_showtds_top_like_show जेष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी का धर्म ग्रंथों में विशेष महत्व बताया गया है। इस एकादशी का पूर्ण लाभ लेने के लिए लोग जनपद के पश्चिम वाहिनी बलुआ घाट पर तड़के से ही गंगा स्नान करने में जुट गए,जिससे भारी भीड़ देखने को मिली। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील
 
निर्जला एकादशी पर लोग लगा रहे हैं गंगा में डुबकी

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जेष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी का धर्म ग्रंथों में विशेष महत्व बताया गया है।  इस एकादशी का पूर्ण लाभ लेने के लिए लोग जनपद के पश्चिम वाहिनी बलुआ घाट पर तड़के से ही गंगा स्नान करने में जुट गए,जिससे भारी भीड़ देखने को मिली।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि अब लोगों को कोरोना के साथ जीवन व्यतीत करना होगा।जिसकी सीख लेते हुए लोगों ने बढ़ते कोरोना के संक्रमण को नजर अंदाज कर भारी मात्रा में गंगा घाट पर पहुंचकर स्नान करते हुए दान एवं पूजन कर पुण्य लाभ लिया ।इस एकादशी को भीमसेनी तथा निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। धर्म ग्रंथों में उल्लेख है कि महर्षि वेदव्यास ने पांडवों को वर्ष में पड़ने वाले 24 एकादशी के बदले में जेष्ठ मास की शुक्ल पक्ष एकादशी का एक व्रत रहने का पुण्य लाभ लेने का उपदेश दिया था ।

निर्जला एकादशी पर लोग लगा रहे हैं गंगा में डुबकी
महर्षि वेदव्यास द्वारा बताया गया है कि इस एकादशी का व्रत कर विष्णु भगवान की पूजा करने से मनोवांछित कामनाएं पूर्ण होती है। इस एकादशी का आध्यात्मिक महत्व के साथ ही वैज्ञानिक पहलू भी है। मई-जून के भीषण तपते महीने में पड़ने वाले इस एकादशी को निर्जला व्रत रखकर शरीर को तपाया जाता है, ताकि आने वाले विषम परिस्थितियों में अपने आपको बिना जल के भी बचाया जा सके।

यही नहीं हिंदू धर्म के मनीषियों ने भविष्य की स्थितियों का आकलन कर जल के संचय एवम संवर्धन की भी सीख दिया है।

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