जानिये CMO कार्यालय के कारनामे, कैसे स्वास्थ्य विभाग आगे जाने के लिए नियमों का उड़ाता है धज्जिया

चंदौली जिले में कारनामों का एक से बढ़कर एक नमूना देखने को मिल रहा है। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में ऐसे कारनामे किए गए हैं कि जिसे आप भी सुनकर यह भूल जाएंगे कि क्या यह भी हो सकता है ।

यह तो एक पिछड़े जिले का कारनामा है इसीलिए कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग में कुछ ऐसे कारनामे होते हैं । जिन्हें लोगों को हवा तक नहीं लगती इसीलिए बुजुर्गों का कहना है कि तालाब की एक मछली सारे तालाब को गंदा कर देती है। जिसका एक नजीर जिले के स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत भी कर दिया गया है । जो कि पुरे प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है ?

बताते चलें कि 13 मार्च 2020 को एक अखबार में चौकाने का विज्ञापन प्रकाशित हुआ था । जिसमें चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों के लिए 31 मार्च 2020 तक की सेवा देने के लिए आवेदन मांगा गया लेकिन कोविड-19 के कारण इस आवेदन पर बहुत माथापच्ची होना शुरू हो गई।

इस विज्ञापन में यह भी प्रदर्शित किया गया कि यह अल्पकालीन 31 मार्च 2020 तक ही सेवा देने के लिए रखा गया है। बेरोजगारी का आलम कुछ इस प्रकार था कि इसमें बहुत से लोगों द्वारा आवेदन भी किया गया लेकिन करोना के दस्तक देने के कारण मामला रुक गया । यह जरूर रहा कि विभाग द्वारा इसमें गुणा गणित करने वाले लोगों द्वारा पूर्व जिला अधिकारी से दो चार बार फाइल प्रस्तुत की गई और इससे पूर्व जिला अधिकारी स्वास्थ्य विभाग के कारनामे को जानने के कारण उनकी फाइलों पर किसी प्रकार की सहमती देने के बजाय उसे वापस कर दिया।

कहा गया है कि यदि कार्य सिद्ध करना है तो व्यक्ति किसी भी स्तर तक जा सकता है। जिले को प्रदेश के 8 पिछले जिले में शामिल किया गया है और इसे अग्नि जिले में लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अपने कारनामे से आगे लाने का प्रयास कुछ इस प्रकार किया गया । इसी दौरान पूर्व जिला अधिकारी का ट्रांसफर हो गया और नए निजाम का आगमन होते ही सीएमओ ऑफिस के लोग जोड़-तोड़ और मिले-जुले उस्तादों से ऐसी दौड़ लगाई कि नए डीएम साहब इस मामले को जब तक समझते तब तक सारी प्रक्रिया भी पूर्ण कर ली गई ।

नए जिलाधिकारी के मौन समर्थन पर एक ही दिन में तेजी दिखाते हुए इस कारनामे को अंजाम दे दिया गया । अब मामला कुछ इस प्रकार चर्चा में आया कि क्या बात थी कि पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी आर के मिश्रा के सेवानिवृत्त होने के 2 दिन पूर्व ही इस कारनामे को पूर्ण कर लिया गया । पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अपनी दरिया दिली दिखाते हुए कुछ ऐसे ही तरह के उच्च पदस्थ लोगों की कमेटी के साथ अपनों का कल्याण कर दिया जो प्रक्रिया ही अपने आप में एक नजीर बन गयी ।

बताते चलें कि राष्ट्रीय बाल कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत 4 आयुष महिला चिकित्सक, 4 ए.नम, 2 स्टाफ नर्स एवं एक फार्मासिस्ट के लिए 29 और 30 जनवरी को इंटरव्यू बुलाया गया था । जिसका विज्ञापन 31 मार्च 2020 तक ही था । इंटरव्यू का नजारा 29 और 30 जनवरी 2021 में देखने को मिला है। तो इस कार्यशैली पर जिला अधिकारी संजीव सिंह ने मोहर लगाकर इस गोलमाल के इस खेल को और बल दे दिया ।

30 जनवरी 2021 को संपन्न होने वाले साक्षात्कार के ही दिन चयन कर अनुमोदन कर दिया गया। खेल इतने पर ही नहीं रुका उसी दिन नियुक्ति कर नियुक्ति पत्र डिस्पैच भी कर दिया गया तथा उसी दिन निर्धारित अस्पताल में कार्यभार भी ग्रहण करा दिया गया। इस भ्रष्टाचार की आलम को यदि देखा जाए तो कहीं ना कहीं प्रदेश के 8 पिछले जिलों में ऐसा कारनामा नहीं हुआ होगा। जो कि चंदौली अपने अगले जिले के लिस्ट जाने की दौड़ में कर रहा है।

इधर सीएमओ साहब की 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होकर भावभीनी विदाई भी दे दी गई लेकिन कार्यक्रम सब इतना जल्दी से हुआ कि साहब को मिलने वाले चढ़ावा कुछ शेष रह गए थे। जो कि साहब के सेवानिवृत्त होने के बाद आश्वस्त किया गया कि अतिशीघ्र आपका शेष धनराशि आपको अर्पित कर दी जाएगी। अब ऐसे कारनामे को और ऐसी नियुक्ति प्रक्रिया पर कहीं ना कहीं प्रश्नचिन्ह उठता हुआ दिख रहा है कि इस गोलमाल की कहानी में पूरा चिकित्सा विभाग बदनाम होने के आसार से पीछे नहीं हो रहा है ।

अब ऐसे में देखना है कि नए कमान संभाले हुए जिला अधिकारी व नया मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा इस प्रक्रिया को किस नजरिए से देखकर संविदा समाप्त होने के बाद भी उन डॉक्टरों व चिकित्सा कर्मियों को वेतन देने का काम करते हैं या ऐसे कारनामें करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनके खिलाफ कार्यवाही कराने का काम करते हैं