चंदौली जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चकिया के उपकेन्द्र सिकन्दरपुर शासन के निर्देशानुसार अनलॉक के बाद टीकाकरण सत्र शुरू किए जा चुके हैं। इस क्रम में बीते बुधवार को चकिया के उपकेन्द्र सिकन्दरपुर मे आशा, एएनएम, आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की देखरेख में टीकाकरण सत्र का आयोजन किया गया जिसमें गर्भवती महिलाओं, बच्चों एवं किशोरियो को सुविधायें दी गई।

इस दौरान कोविड-19 के प्रोटोकॉल और सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन किया गया।
पीएचसी चकिया के स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी शिव प्रकाश सिंह ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने की वजह से लॉकडाउन के दौरान स्वास्थ्य सेवाएँ स्थगित कर दी गईं थी। वहीं अनलॉक के बाद पुनः सेवाएँ शुरू कर दी गयी हैं। उन्होने कहा कि टीकाकरण सत्र प्रत्येक बुधवार और शनिवार को प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित किया जाता है। कोविड के दौरान ज्यादा सावधानियों को ध्यान में रखते हुए सेवायें जारी रखना है जिसके लिये पीएचसी के समस्त स्टाफ को ट्रेनिंग भी दी गई है। इस दौरान बच्चों को बीसीजी, पैंटा वैक्सीन 1-2-3, पोलियो ड्रॉप, रोटा वायरस वैक्सीन, आईपीवी का टीका, डीपीटी बूस्टर-1 टीका, मीजल्स-रूबेला आदि टीके लगाए गए। बच्चों को विटामिन ए सिरप भी पिलाया गया।

साथ ही गर्भवती महिलाओं को टीडी का टीका लगाया गया और उनकी गर्भावस्था जांच की गयी। एएनएम अनुराधा ने बताया कि प्रसव से पहले गर्भवती महिला और भ्रूण की देखरेख आशा, एएनएम और आँगनबाड़ी बहनों पर होती है। आशा, एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर सर्वे के दौरान टीके लगे बच्चों की जानकारी और समय-समय पर उचित सलाह देती रहती हैं। बच्चों को टीका लगाने के बाद होने वाली तकलीफ के बारे में परिवार के सदस्यों को आगाह कर देते हैं जिससे उन्हे बाद में किसी भी प्रकार की समस्या न हो। टीका लगाने के बाद बच्चों को बुखार, सूजन के साथ ही टीके लगे स्थान की त्वचा लाल हो जाना सामान्य बात है जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर इसकी उचित सलाह ले सकते हैं।

यह कहना है लाभार्थियों का……
सात महीने की तमन्ना की माँ ने कहा कि कोरोना के कारण डर तो लगता है लेकिन एएनएम दीदी के साथ होने की वजह से उन्होने अपनी बेटी का टीकाकरण कवाया।
गर्भवती सहाना ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र पर गई और टीका भी लगवाया। लेकिन इस दौरान सभी महिलाओं से उचित दूरी बनाई रखी। कोरोना वायरस को लेकर सावधानियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ख़ासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं को उचित परामर्श दिया जा रहा है।

साफ़-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। खानपान की वस्तुओं को अच्छे से धोकर ही इस्तेमाल किया जा रहा है। साबुन से बार-बार हाथ धोने है, कम से कम दो मीटर की दूरी बनाए रखना और नाक-मुंह को ढकना ही इस महामारी से बचने का एक मात्र उपाय है।