देवों के देव महादेव को खुश करने का सबसे बड़ा दिन यानी महाशिवरात्रि आगामी चार मार्च को है। महाशिवरात्रि की पूजा का बड़ा महत्व है।इस दिन अगर कोई पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करे तो उसके जीवन में सुख≤ृद्धि आती है और सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही ऐसा कहा गया है कि अगर महाशिवरात्रि का व्रत कोई पुरुष करें तो उसे धन-दौलत, यश की प्राप्ति होती है, साथ ही अगर कोई महिला इस व्रत को करें तो उसे सुख-सौभाग्य एवं संतान की प्राप्ति होती है। इसके अलावा अगर कोई कुंवारी कन्या इस व्रत को करती है तो सुन्दर एवं सुयोग्य पति पाने की उसकी कामना पूर्ण होती है।

जीवन में कोई साधना न होने पर भी इस दिन ऊर्जा ऊपर की ओर बढ़ती है। मगर खास तौर पर योगिक साधना करने वाले लोगों के लिए, इस रात को अपने शरीर को सीधी अवस्था में रखना, या न सोना बहुत महत्वपूर्ण है।

महाशिवरात्रि ऐसे लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो आध्यात्मिक मार्ग पर हैं। संसार में महत्वाकांक्षा रखने वाले और गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों के लिए भी यह उतना ही अहम है।

 गृहस्थ जीवन बिताने वाले लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाते हैं। महत्वाकांक्षी लोग इसे उस दिन के रूप में देखते हैं, जब शिव ने अपने शत्रुओं पर जीत हासिल की थी।

मगर योगिक परंपरा में, हम शिव को एक ईश्रवर की तरह नहीं देखते, बल्कि प्रथम गुरु या आदि गुरु के रूप में देखते हैं, जिन्होंने योगिक प्रकिया की शुरुआत की थी। शिव का मतलब है वह, जो नहीं है। अगर आप खुद को ऐसी स्थिति में रख सकते हैं कि आप, आप न रहें और शिव को होने दें, तो जीवन में एक नई दरुष्टि लाने और जीवन को पूर्ण स्पष्टता से देखने की संभावना हो सकती है।

ऐसे करें पूजा

  •  भगवान शंकर की पूजा के समय शुद्ध आसन पर बैठकर पहले आचमन करें।
  •  यज्ञोपवीत धारण कर शरीर शुद्ध करें।तत्पश्चात आसन की शुद्धि करें।
  •  पूजन-सामग्री को यथास्थान रखकर रक्षादीप प्रज्ज्वलित कर लें। अब स्वस्ति-पाठ करें।
  •  स्वस्ति-पाठ-स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवा,स्वस्ति ना पूषा विश्रववेदा, स्वस्ति न स्तारक्ष्यो अरिष्टनेमि,स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु।
  •  इसके बाद पूजन का संकल्प कर भगवान गणेश एवं गौरी-माता पार्वती का स्मरण कर पूजन करना चाहिए।
  •  संकल्प करते हुए भगवान गणेश व माता पार्वती का पूजन करें फिर नन्दीश्रवर, वीरभद्र, कार्तिकेय स्त्रियां कार्तिकेय का पूजन नहीं करें एवं सर्प का संक्षिप्त पूजन करना चाहिए।
  •  इसके बाद हाथ में बिल्वपत्र एवं अक्षत लेकर भगवान शिव का ध्यान करें।