चंदौली में बढ़ती साक्षरता व घटता लिंगानुपात, सोचने व पहल करने की है जरूरत

चंदौली जिले में बेटियों को बचाने के लिए सरकार तमाम प्रयास कर रही है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान जिले स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक चलाया जा रहा है मगर अब भी लोग बेटियों को लेकर बहुत जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। वर्ष 2001 की जनगणना के मुकाबले वर्ष 2011 की जनगणना पर नजर डालें तो महिलाओं की साक्षरता दर में बढ़ोत्तरी हुई लेकिन लिंगानुपात में महिलाओं की संख्या कम हो गई। विभाग अब लिंगानुपात बढ़ाने के लिए अभियान चलाने की तैयारी में है ताकि बेटियों की संख्या को बढ़ाया जा सके।

जिला प्रोबेशन विभाग के अनुसार, जिले में 2011 के जनसंख्या आंकड़ों के हिसाब से 1000 पुरुषों पर 918 महिलाएं है, जबकि वर्ष 2001 की जनगणना में यह संख्या 922 प्रति एक हजार पुरुष रही।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2001 में महिला साक्षरता दर जहां 44.13 रहीं, वहीं वर्ष 2011 में महिला साक्षरता दर 60.35 प्रतिशत है। आकांक्षात्मक जिले में वैसे भी शिक्षा का काफी अभाव है। दुर्गम पहाड़ी इलाका हो या मैदानी हर जगह साक्षरता दर औसत से कम ही है। इसमें बालिकाओं की शिक्षा का अनुपात बालकों के औसत में बहुत खराब है। साक्षरता दर की कमी का असर लिंगानुपात पर भी दिख रहा है।

वर्ष 2011 के जनसंख्या आंकड़ों के अनुसार जिले की जनसंख्या 1,952,756 रही। इसमें पुरुषों की संख्या 1017905 थी जबकि महिलाओं की संख्या 934851 है। जिले में औसत साक्षरता दर 71.48 प्रतिशत है। इसमें पुरुष साक्षरता दर जहां 81.72 है तो महिला साक्षरता दर 60.35 प्रतिशत ही है।

चंदौली जिले की जिला प्रोबेशन अधिकारी इंद्रावती यादव का कहना है कि जिले में लिंगानुपात और साक्षरता दर बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाने की जरूरत है। आंकड़ों को देखने से लगता है कि जिले में साक्षरता दर में बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन लिंगानुपात में कमी आयी है। यह अच्छी बात नहीं है। इसको दूर करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित जाएगा ताकि महिलाओं और पुरुषों के अनुपात को बराबर किया जा सके।