चंदौली जिले में ग्राम्या संस्थान के शुक्रवार को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सभागार कक्ष में महिला स्वास्थ्य अधिकार अभियान के अंतर्गत चिकित्सकीय गर्भ समापन कानून को लेकर परिचर्चा आयोजित की गई।

चर्चा के दौरान संस्थान की नीतू सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में करीब तीस लाख प्रवासी लोग अपने घरों में वापस आए हैं। अब इन लोगों के लिए इनके रोजगार के साथ उनके स्वास्थ्य की आवश्यक जरूरतों का ना मिल पाना और भी समस्या है। लगातार मीडिया व जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोगों के अनुभव यह बताते हैं कि इस दौरान लोगों को गर्भनिरोधक साधनों का ना मिलना जिसके कारण अनचाहा गर्भ का ठहर जाना आदि समस्या बन गई है। यदि लोग अनचाहे बच्चे को लेकर चिकित्सकीय गर्भ समापन कानून (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी अधिनियम 1971) के तहत गर्भ समापन कराना चाहे तो उनको ना ही डॉक्टर मिल रहे हैं ना ही अस्पताल द फेडरल में प्रकाशित खबर बताती है कि 100 में से 80% लोगों ने दवाई व सर्जरी जैसी दोनों सुविधा ना मिल पाने से गर्भ समापन नहीं करा पाए उन्होंने कहा कि मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेगनेंसी अधिनियम 1971 यानी चिकित्सकीय गर्भ समापन कानून के अंतर्गत महिलाएं कुछ विशेष परिस्थितियों में सरकारी अस्पताल में या सरकार की ओर से अधिकृत किसी भी चिकित्सा केंद्र में प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा गर्भ समापन करा सकती हैं।

इस कानून के अंतर्गत कोई भी महिला 20 सप्ताह तक कानूनी रूप से गर्भ समापन करा सकती है कहा कि इस तरह की समस्याओं को देखते हुए लड़कियों महिलाओं व अन्य प्रभावित लोगों की मदद के लिए ग्राम्या संस्थान व सहयोग संस्थान लखनऊ द्वारा 1 जुलाई से कोविड सपोर्ट सखी हेल्पलाइन 180 0212 4471 नंबर शुरू किया गया है जहां ईस हेल्पलाइन पर फोन कर अपनी बात, समस्या आदि साझा कर सकते हैं।

चंदौली जनपद में इस हेल्पलाइन की शुरूआत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगढ़ केअधीक्षक डॉक्टर अवधेश पटेल ने की इस नंबर पर आपको कानूनी सलाह भी दी जाएगी।

इस अवसर पर रामविलास, मदन मोहन, रामबली, रिंकू, एवं अन्य अस्पताल के स्टाफ वआशाएं मौजूद रहीं।