तो अब दशहरे व दीपावली के बाद वापस परदेश जाने की तैयारी कर रहे प्रवासी मजदूर..!

चंदौली जिले में भी वैश्विक महामारी की मार झेलकर जीवन व रोजगार की तलाश में घर लौटे प्रवासियों को अब भी मायूसी हाथ लगी है। सीएम की घोषणा के अनुरूप गृ़ह जनपद में रोजगार दिलाने में स्थानीय प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। ऐसे में प्रवासियों के लिए परदेश लौटने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। जिले में करीब 16 हजार प्रवासी आए थे। इसमें अभी तक तकरीबन दो हजार को ही रोजगार मिला है, जबकि शेष या तो मनरेगा में मजदूरी कर गुजर-बसर कर रहे हैं या कंपनियों में बात कर वापस महानगरों को लौटने की योजना बना रहे हैं।

ग्राम्य विकास विभाग की ओर से 1100, उद्योग से 240, खादी ग्रामोद्योग 795, सेवायोजन विभाग से 200 प्रवासियों को रोजगार दिलाया गया है। करियर काउंसिलिग शिविर में 7500 से अधिक प्रवासियों को सलाह दी गई। उन्हें रोजगार से जोड़ने की जिम्मेदारी जिले के 14 विभागों को सौंपी गई है। कौशल विकास मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, ग्राम्य विकास, कृषि, उद्यान, शिक्षा, श्रम समेत अन्य विभाग शामिल हैं। लेकिन वैश्विक महामारी के दौर में रोजगार के अवसर तलाशने में सरकारी विभाग नाकाम साबित हो रहे हैं। इसके चलते प्रवासियों को मायूसी हाथ लगी है।

विभागीय अधिकारियों का दावा है कि अधिकांश प्रवासी अप्रशिक्षित हैं। इसके चलते उन्हें नौकरी दिलाना अथवा हुनर वाले कार्यों से जोड़ना मुश्किल साबित हो रहा। विभागों के पास प्रवासियों के वापस लौटने का मुकम्मल आंकड़ा नहीं है फिर भी अधिकारी मानते हैं कि करीब 50 फीसद वापस महानगरों को लौट चुके हैं। गृह जनपद में मौजूद अप्रशिक्षित प्रवासियों का जाब कार्ड बनवाकर मनरेगा के तहत काम दिलाया जा रहा है। उन्हें मजदूरी का नियमित भुगतान किया जा रहा।

टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव

सेवायोजन विभाग की ओर से प्रवासियों की करियर काउंसिलिग में दर्जनों ऐसे मिले, जो अहमदाबाद, सूरत व लुधियाना जैसे शहरों से लौटे थे। उनके पास टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव है। जिला प्रशासन यदि रामनगर व वाराणसी स्थित टेक्सटाइल्स फैक्ट्रियों में उन्हें काम दिला सकता है तो उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल जाएगा। वहीं फैक्ट्री संचालकों को भी सहूलियत होगी।

प्रशिक्षण को लेकर विभाग उदासीन

अप्रशिक्षित प्रवासियों को प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बनाने में विभाग उदासीन बना हुआ है। उद्योग विभाग की ओर से कुछ प्रवासियों को विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत प्रशिक्षण दिलाया गया था। टूल किट भी दिया गया है। लेकिन अन्य विभाग रुचि नहीं ले रहे हैं। इससे प्रवासियों के लिए रोजगार के द्वार नहीं खुल रहे हैं।

चंदौली जिले के सीडीओ ने कहा कि प्रवासियों को रोजगार दिलाने के लिए जरूरी काम किए जा रहे हैं। जिले के लगभग 14 विभाग इसके लिए काम कर रहे हैं, अन्य विभागों को भी शामिल किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।