भाव के भूखे होते हैं भगवान, भोग के नहीं : व्यास रामानुज….

चंदौली जिले के शहाबगंज क्षेत्र के अमांव में चल रहे बाबा मुरलीधर श्री रामचरित मानस सेवा समिति के तत्वाधान में संगीतमय श्री राम कथा के आठवें दिन कथा व्यास श्री रामानुज शरण शास्त्री जी ने कथा के प्रसंग में, भक्त और भगवान के संवाद की। चर्चा करते हुए बताया भगवान तो भक्तों के अधीन होते हैं ।भक्त जैसे जिस प्रकार से परमात्मा को स्मरण करता है परमात्मा उसी प्रकार से उसी भाव में भक्तों के पास आने को व्याकुल हो जाते हैं । चाहे तो गजराज रहे द्रोपदी रहे मैया शबरी अथवा ताज खां बेगम रहे भगवान तो सर्वदा भक्तों की भक्ति के पास में बंधे हैं । हमें भगवान को अपने अधीन करने हेतु उनसे एक विशेष संबंध जोड़ने की आवश्यकता पड़ती है और जिस दिन भगवान से एक नाता जुड़ जाता है भगवान हमारे हो जाते हैं और हम उनके हो जाते हैं।

महाराज जी ने ताज खां बेगम की कथा सुनाते हुए कहा ताज खा बेगम मुसलमान होकर भी उसे छैल छबीली छटा वाले श्री यशोदा नंदन भगवान श्री कृष्ण के भक्ति में ओतप्रोत हो गए ताज खान बेगम ने भगवान श्री कृष्ण के चरणों में ही अपने जीवन को व्यतीत किया । हम सब को भी ताज खान बेगम आदि भक्तों से शिक्षा लेनी चाहिए । जैसे उन भक्तों ने भगवान को अपने वश में किया था वैसे आप अपने मन में विचार करें तो क्या परमात्मा हमारे बस में नहीं हो सकते। बस संबंध तो जोड़ो फिर आत्मा और परमात्मा में कोई विशेष दूरी नहीं रहती । वह परमात्मा सदा ही भक्तों की आत्मा में रमण करता है और यह जीवात्मा भगवान के परमात्मा के हृदय में रमण करता है इसलिए जीवन में भक्ति होना अत्यंत आवश्यक है ।

यदि हमें भगवान की प्राप्ति करनी हो तो बस एक मार्ग का चयन करें भक्ति मार्ग का वैसे भी भगवान गीता जी में कहते हैं तुम मेरे लिए एक कदम बढ़ा मैं तेरे लिए पांच कदम चल कर आऊंगा बस हमें भी सर्वतो भामने भगवान के अधीन होना पड़ेगा तब जाके परमात्मा हम सबको सुलभ सार्थक तरीके से उन की प्राप्ति हो जाएगी।

इस अवसर पर होसिला विश्वकर्मा,बिक्रमा सुनिल सिंह,रामवृक्ष ,समशेर,अजय भारती, मदन कुमार, अवधेश, सुरज, अविनाश, चन्द्रावती, अन्जू, अनीता, प्रभावती, रीता, गरीमा आदि भक्तगण उपस्थित रहे।