अगर घर में शौचालय रहा होता तो बच सकती थी नाबालिग बालिका की आबरू

प्रतीकात्मक तस्वीर

जिले में काश सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य हुए होते तो बाहर शौच करने गई नाबालिग युवती दरिंदगी से बच जाती। कागजों पर जिला ओडीएफ घोषित तो है,मगर धरातल पर होता तो युवतियों पर हो रही रेप की घटनाएं कम हो जाती।

सकलडीहा क्षेत्र के एक गांव में बाहर शौच करने गई युवती के साथ 2 लोगों द्वारा जबरदस्ती सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला आया है। इस घटना को लेकर प्रबुद्ध लोगों में चर्चा छिड़ गई कि काश सरकार के मनसा के अनुरूप कार्य होता तो ऐसी घटनाओं पर विराम लग जाता।


भाजपा की केंद्र व प्रदेश की सरकार ने खुले में शौच को रोकने के लिए मुहिम चलाकर सबको शौचालय देने का निर्णय लिया था,लेकिन सरकार के इस पहल को ग्राम प्रधान से लेकर अधिकारी तक इस योजना को लूट का धंधा बना लिया, जिसका परिणाम है कि शौचालय कागजों पर बन गए और जनपद भी कागज में ओडीएफ घोषित हो गया लेकिन धरातल पर कार्य दिखाई नहीं दे रहा है।


शौचालय नहीं बनने से अभी भी बहुत से गरीब परिवार मजबूरी में बाहर झाड़ झंकार में शौच के लिए जाते हैं। जिसका परिणाम है कि महिलाओं एवं बच्चियों को दरिंदगी का दंश झेलना पड़ता है वहीं विषैले जीव जंतुओं के काटने से भी जान गवानी पड़ती है। अगर जिला हकीकत में ओडीएफ होता तो सकलडीहा क्षेत्र की नाबालिक युवती इस दर्द विदारक घटना से बच सकती ।