19 जनवरी 2020 को चंदौली जिले के मुगलसराय थाना के चौरहट पड़ाव निवासी राशिद अहमद को यूपी एटीएस ने आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। छह अप्रैल 2020 को एनआईए की लखनऊ शाखा ने राशिद के खिलाफ एक नया मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की। तफ्तीश के क्रम में राशिद को एनआईए ने अदालत से कस्टडी रिमांड पर लिया।

राशिद अहमद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम वाराणसी और चंदौली में दर्जन भर स्थानों पर लेकर गई। 15 सदस्यीय एनआईए की टीम लगभग 16 घंटे के दौरे में उस हर स्थान की राशिद से तस्दीक कराई, जहां की फोटो और वीडियो वह आईएसआई एजेंट को भेजी थी। इस दौरान एनआईए ने राशिद के पिता, मां, नाना और उसके दोस्तों सहित उसे जानने वाले अन्य लोगों का बयान दर्ज किया और फिर वापस लखनऊ रवाना हो गई।

राशिद ने गिरफ्तारी के दौरान एटीएस को बताया था कि वह वर्ष 2017 और 2018 में अपनी मौसी के घर कराची गया था। उसी दौरान मौसेरे भाई के माध्यम से आईएसआई के दो एजेंट के संपर्क में आया। पैसे और महंगे उपहारों के लालच में आकर वह आईएसआई एजेंट को मार्च 2019 से प्रदेश और देश के संवेदनशील स्थानों की फोटो और वीडियो भेजने लगा। आईएसआई एजेंट ने उसे प्रशिक्षित किया था कि प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों में जाकर चोरीछिपे कैसे फोटो खींचना है और वीडियो बनाना है।

इसी साल जनवरी में एटीएस द्वारा चंदौली जिले से गिरफ्तार किया गया राशिद अपनी प्रेमिका को पाने की चाहत में आईएसआई का एजेंट बन गया था। राशिद पाकिस्तान में रह रहे अपने मामा की लड़की से प्यार करता था। घर वालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। इसकी जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को हुई और फिर आईएसआई व डिफेंस के एक अधिकारी ने उसकी शादी उसकी प्रेमिका से कराने का वादा कर भारत से गोपनीय सूचनाएं मंगाने लगे।

जानकारी के अनुसार राशिद 2017 और 2018 में दो बार वह पाकिस्तान में अपनी मौसी हसीना बेगम के पास गया था और कराची में रुका था। वहीं पर राशिद के मामा नजीर भी रहते थे, जिनकी बेटी से वह प्यार करने लगा। लेकिन मामा को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। राशिद का मौसेरा भाई शाहजेब आईएसआई और पाकिस्तानी डिफेंस के संपर्क में था।

शाहजेब ने राशिद की प्रेम कहानी आईएसआई और पाकिस्तानी डिफेंस के आसिम और आमद को बताई और फिर शाहजेब ने ही राशिद की मुलाकात इन दोनों से कराई। आसिम और आमद ने उसकी प्रेमिका से शादी कराने का वादा किया और इसके बदले भारत के महत्वपूर्ण व संवेदनशील स्थानों की की फोटो, नक्शे और सेना के मूवमेंट की जानकारी मांगी गई। इसके बदले राशिद को पैसे भी देने का वादा किया गया।

राशिद भारत वापस आकर आईएसआई और पाकिस्तानी डिफेंस के लिए काम करने लगा। उसने कई महत्वपूर्ण स्थानों और धार्मिक स्थलों की तस्वीरें पाकिस्तान में बैठे आईएसआई और डिफेंस के अधिकारियों को भेजी। उसने दो फोन नंबरो को एक्टिवेट करा कर पाकिस्तान में आसिम और आमद को व्हाट्स एप चलाने के लिए ओटीपी बताया। यानी नंबर भारत का था और उस पर व्हाट्स एप पाकिस्तान में चल रहा था। इसके बदले राशिद को पांच हजार रुपये भी भेजे गए थे। राशिद इन्हीं व्हाट्स एप नंबरों पर संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें और नक्शे पाकिस्तान को भेजता रहता था।

एनआईए राशिद के करीबियों की भी जानकारी जुटा रही है। जिस पेटीएम खाते में पैसे भेजे गए थे, उस मोबाइल धारक से भी जल्द ही पूछताछ की जा सकती है। हालांकि एटीएस की जांच के दौरान सामने आया था कि जिन लोगों के नाम से सिम कार्ड खरीदे गए थे और जिसके पेटीएम का इस्तेमाल पाकिस्तान से पैसा मंगाने के लिए किया गया था, उन्हें राशिद के द्वारा की जा रही जासूसी के बारे में जानकारी नहीं थी। इसी आधार पर एटीएस ने पूछताछ के बाद बाकी लोगों को छोड़ दिया था।