चंद्रप्रभा बांध का होगा कायाकल्प, 6 करोड़ 83 लाख की योजना पहुंची है शासन में

चंदौली जिले के नौगढ़ व चकिया के पहाड़ी क्षेत्र मे स्थित व जिले के खेतों को संजीवनी देने वाले चंद्रप्रभा बांध के दिन बहुरने वाले हैं। सिचाई विभाग ने जीर्णशीर्ण हो गए बांध के कायाकल्प के लिए 6 करोड़ 83 लाख 69 हजार की कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी है। शासन से हरी झंडी मिलते ही बांध के कायाकल्प का कार्य शुरू हो जाने की उम्मीद है।

60 दशक पूर्व बने बांध की समय समय पर मरम्मत नहीं हो सकी। इससे चंद्रप्रभा सिस्टम बेजार होता चला गया। बांध की हालत खराब होने पर 2006 में विभाग की मांग के अनुरूप सरकार से 5 करोड़ 23 लाख धन आवंटित हुआ। 2008 में प्रारंभ हुआ कार्य चींटी की गति शुरू वह भी मानक के अनुरूप नहीं हुआ। नतीजा यह रहा कि बांध के गेट छलका का रिसाव पूरी तरह बंद नहीं हो सका। यह देख अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। 2009 के अंतिम 3 महीने में विभाग के उच्चाधिकारियों की नकेल कसने पर दोबारा मरम्मत हुई लेकिन पानी का रिसाव बंद नहीं हो सका। कमोवेश यही स्थिति मुजफ्फरपुर बीयर छलके में जारी रिसाव की है। एक करोड़ रुपये गंवाने के बाद भी किसानों की उम्मीद पर बांध खरा नहीं उतर सका।

1955-60 तक चला था प्रोजेक्ट कार्य

चंद्रप्रभा बांध का कार्य 1955 से प्रारंभ होकर 1960 में पूरा हुआ। इसका नाम चन्द्रप्रभा सिस्टम पड़ा। सिस्टम पर आधारित मुजफ्फरपुर बीयर का निर्माण कर संचालन प्रारंभ हुआ। नहरों, माइनरों का जाल बिछाया गया। मकसद था सिंचाई की मुकम्मल व्यवस्था करना। सरकार को इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली। यह इलाका धान के कटोरे से मशहूर हो गया। पर हुक्कमरानों की लापरवाही से तीन दशक पूर्व से रिसाव की समस्या खड़ी हो गई।

बांध का होगा कायाकल्प

चंदप्रभा प्रखंड के अधिशासी अभियंता बांध के कायाकल्प को लेकर गंभीर हो गए हैं। पिछले दिनों बांध का बकायदा निरीक्षण किया। ड्रैप रिहैब्लीएशन इंप्रलेशन प्रोग्राम टू के तहत परियोजना तैयार कर शासन को भेजी गई है। परियोजना के तहत छलका गेट से पानी के रिसाव को बंद करना, क्षतिग्रस्त बैंक की मरम्मत, कंट्रोल केबिन की मरम्मत, आपातकालीन गेट मरम्मत आदि का कार्य किया जाना है। डैम के निरीक्षण के लिए केंद्रीय जल आयोग की टीम को पत्र भेजा गया है। बांध में 771.03 फिट है पानी

चंद्रप्रभा बांध छलके में छोटे बड़े दर्जन भर छिद्र होने से पानी का रिसाव तेज गति से जारी है। फिलहाल 771.3 फिट पानी है। गर्मी के दिनों में बांध से पशुओं को पीने के लिए पानी छोड़ने और छलका तट से जारी रिसाव होने की स्थिति में खरीफ की फसल के लिए धान की नर्सरी डालने के लिए पानी उपलब्ध होना मुश्किल प्रतीत हो रहा है। यह स्थिति पिछले कई वर्षों से बनी हुई है।

यह बोल रहे साहब

अधिशासी अभियन्ता, चंदप्रभा प्रखंड सर्वेश चंद्र सिन्हा का कहना है कि चंद्रप्रभा बांध के कायाकल्प के लिए सात करोड़ का कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी गई है। शासन से हरी झंडी मिलते ही परियोजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा।