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चंदौली जिले में कहा जाता है कि कुछ अधिकारियों ने चंदौली जिले को लूट का अड्डा बना लिया है। बिना काम किए करोड़ों का बजट अक्सर हड़प जाया करते हैं। अबकी बार नहरों की सिल्ट सफाई में मूसाखांड़ और चंद्रप्रभा डिविजन के अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिली भगत करके खूब धांधली की है।

कहा जा रहा है कि कई नहरों की सिल्ट सफाई के बगैर ही भुगतान के लिए फाइल प्रस्तुत कर दिया गया। लेकिन डीएम नवनीत सिंह चहल ने एसडीएम और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के भौतिक सत्यापन कराया तो अफसरों की करतूत उजागर हो गई।

मामले में डीएम ने चंद्रप्रभा डिविजन के नहरों की सफाई में मिली गड़बड़ी के चलते भुगतान में तीस प्रतिशत कटौती का निर्देश दिया है।

जिले में मूसाखांड व चंद्रप्रभा डिविजन में लगभग 55 नहरें हैं। इनकी सिल्ट सफाई को शासन से तीन करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। लॉकडाउन के दौरान दोनों विभागों ने नहरों की सफाई का कार्य शुरू कराया। करीब एक महीने तक जेसीबी, मनरेगा मजदूरों के माध्यम से सिल्ट साफ की गई। इसके भुगतान की फाइल डीएम के समक्ष पहुंची तो उन्होंने इसकी जांच कराने के लिए पांच एसडीएम और एक्सईएन लोनिवि को लगाया।

करीब एक सप्ताह की जांच में अधिकारियों ने रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में व्यापक अनियमितता मिली है। वहीं बंधी डिवीजन के तहत राजवाहों, माइनरों और ड्रेन की खुदाई के सत्यापन का कार्य चल रहा है। डीएम ने बगैर सत्यापन के किसी भी कार्यदाई संस्था के भुगतान पर रोक लगाया है।

मामले पर नवनीत सिंह चहल ने कहा कि जांच के दौरान नहरों की सिल्ट सफाई में व्यापक गड़बड़ी मिली है। कार्यदाई संस्था चंद्रप्रभा की नहरों के सिल्ट सफाई का भुगतान में 25 से 30 फीसद कटौती करने का निर्देश दिया है। साथ ही अधिकारियों को नोटिस भी जारी किया गया है।