प्राइवेट ITI के प्रधानाचार्यों को दो तिहाई वेतन मिलने की है उम्मीद

चन्दौली जिले के प्राइवेट आईटीआई संस्थानों में कार्य कर रहे प्रधानाचार्यो अनुदेशकों के लिए अच्छी खबर आयी है। कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के अधीन प्रशिक्षण निदेशालय (डीजीटी) भारत सरकार के डायरेक्टर अनिल कुमार ने पत्र जारी कर साफ किया है कि सभी प्रदेशों के प्राइवेट आईटीआई संस्थान मनमानी नहीं कर पाएंगे।

26 जुलाई 2019 की सिफारिशों को लागू करने के लिए सभी राज्यों को शासनादेश जारी कर साफ कहा है कि प्रधानाचार्यों अनुदेशकों को बेसिक सैलरी का दो तिहाई वेतन देने होगे। यह संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए भी लागू हैं। यह जानकारी उत्तर प्रदेश प्राइवेट आईटीआई प्रधानाचार्य अनुदेशक समन्वय समिति के प्रदेश संयोजक ई. सत्येंद्र कुमार मिश्र को 27 अप्रैल 2021 को भेजे पत्र में कहा गया है।

गौरतलब है कि प्रदेश संयोजक मिश्र ने 7 अक्टूबर 2020 को प्रधान मंत्री, केन्द्रीय श्रम मंत्री तथा कौशल विकास मंत्री को ज्ञापन सौंपकर प्रधानाचार्यों तथा अनुदेशकों को राज्य कर्मचारियों की भांति नियमित वेतन बैंक खाते के माध्यम से प्रदान करने, ईपीएफ कटौती करने, मेडिकल अवकाश देने, मेटरनिटी अवकाश सहित आकस्मिक मृत्यु पर प्रधानाचार्य को 25 लाख व अनुदेशकों को 15 लाख बीमा कवर मुहैया कराने की मांग की थी।

डीजीटी भारत सरकार ने सभी राज्यों से चिट्ठी लिखकर तत्काल लागू करने को कहा है। 26 जुलाई 2019 के आदेशों को उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ाई से पालन करने को कहा है। जिसमे बेसिक सैलरी का दो तिहाई वेतन देने की सिफारिश की गई हैं।

डीजीटी का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण योजनाओं का विकास, नीति का विकास, राष्ट्रीय प्रशिक्षण मानक का निर्धारण व सही तरीके से परीक्षाओं का संचालन कराना हैं, तथा प्रशासनिक नियंत्रण राज्य सरकार के अधीन है। इसलिए वेतन देने, ईपीएफ कटौती करने ,बीमा कवर दिलाने, मेडिकल अवकाश प्रदान करने तथा मेटरनिटी अवकाश लागू कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है। समन्वय समिति के प्रदेश संयोजक ने उत्तर प्रदेश सरकार से शीघ्र कार्यवाही कर न्याय दिलाने की मांग की है।