जिला अस्पताल में जारी से मरीजों से वसूली का खेल, 4-5 हजार में लगाते हैं आंखों के लेंस

चंदौली जिले के जिला अस्पताल में आ रहे गरीब मरीजों को अपना शिकार बनाने से डॉक्टर कोई परहेज नहीं कर रहे हैं चाहे वह क्यों न कोविड-19 चल ही रहा हो, ऐसा ही एक मामला जिला अस्पताल के आई सर्जन का सामने आया है जो की आंख के ऑपरेशन करने के नाम पर मरीजों से 3000 से लेकर 5000 तक के रकम वसूल कर रहे हैं। इसकी चर्चा जिला अस्पताल में बहुत जोर शोर से है । मुख्य अधीक्षक ने मामले की जांच कर कार्यवाही करने का आश्वासन दिया।

बताते चलें कि आंख के ऑपरेशन करने के लिए जिले में 2 डॉक्टरो की जिला अस्पताल में तैनात किए गए हैं जिसमें डॉक्टर जेपी मेहता तथा डॉक्टर कमला प्रसाद हैं जेपी मेहता कोरोना पॉजिटिव होने के बाद आंख के ऑपरेशन में रकम पैसा वसूलने की एक परंपरा सी बन गई । जिसमें 20 जनवरी को डॉक्टर कमला प्रसाद द्वारा चार आंख के मरीजों का ऑपरेशन किया गया उसमें मरीजों के परिजन व मरीजों का आरोप है कि डॉक्टर द्वारा 3000 से लेकर 5000 तक लेंस लगाने के नाम पर लिया जा रहा है ।


जबकि सरकार की मंशा है कि आंध्रता निवारण निवारण के मामले में किसी भी प्रकार का कोई भी शुल्क नहीं लिया जाएगा लेकिन डॉक्टर द्वारा लेंस लगाने के नाम पर धन उगाही की जा रही है। इसकी सूचना जब मुख्य अधीक्षक को हुई तो उन्होंने इस संबंध में बताया कि विभाग द्वारा ऑपरेशन के सभी दवाएं व लेंस पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण मंगाया गया है ।आंख के लेंस लगाने की नाम पर धन उगाही करने वाले डॉक्टर की सूचना मिलने पर जांच कर कार्यवाही की जा रही है । उनसे स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है ।

इस संबंध में आई सर्जन डॉक्टर कमला प्रसाद द्वारा बताया गया कि 5000 नहीं लिया जाता है जो मरीज आरोप लगा रहे हैं । वह गलत है लेकिन लेंथ न होने के कारण मरीजों से 2 हजार से ₹3000 लेकर उन्हें अच्छा लेंस लगाया जाता है ।


अब इस मामले में देखना है कि एक तरफ मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर भूपेन द्विवेदी द्वारा दावा किया जा रहा है कि गुणवत्तापूर्ण लेंस जिला चिकित्सालय में मौजूद है और उन्हें निशुल्क लगाना है ,वही डॉक्टर द्वारा गुणवत्तापूर्ण लेंस लगाने के नाम पर 2000 से 3000 तक की रकम लेने की बात कही जा रही है, तो यह कहां तक सत्य है और यदि सत्य है तो ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ जिला चिकित्सालय द्वारा क्या कार्यवाही की जाती है।


यह भी एक सवालिया निशान बन गया है जो कि सरकार के योजनाओं पर कुठाराघात है । अब देखना है कि यह खेल ऐसे ही चलता रहता है या स्वास्थ विभाग द्वारा इस पर अंकुश भी लगाया जाता है । गरीब जनता से ऐसे धन उगाही करने वाले डॉक्टर से कैसे निजात मिल सकता है ।