बदले हालात तो बदल गयी समाजवादी पार्टी की जरूरत, क्या करेंगे रामकिशुन यादव

चंदौली जिले में समाजवादी पार्टी और रामकिशुन यादव एक समय में एक दूसरे के पूरक हुआ करते थे। कहा जाता था कि जहां समाजवादी पार्टी वहां रामकिशुन या जहां रामकिशुन वहां समाजवादी पार्टी हुआ करती थी, लेकिन मौजूदा हालात में यह स्थिति एकदम बदल गई है। अब पार्टी के नए अध्यक्ष सत्यनरायण राजभर और मौजूदा समय में जिले से समाजवादी पार्टी के इकलौते विधायक प्रभु नारायण यादव को लगता है कि समाजवादी पार्टी के इस पुराने नेता की अब कोई खास जरूरत नहीं है। तभी तो उन्हें दूध की मक्खी की तरह निकाल कर बाहर फेंकने की तैयारी चल रही है। हालांकि इस पर न तो पार्टी का कोई नेता कुछ बोल रहा है और न ही रामकिशुन कुछ कह रहे हैं, लेकिन जो कुछ पर्दे के पीछे हो रहा है उसका लोगों में यही संदेश जा रहा है।

कहा जा रहा है कि पहले तो जिला पंचायत के चुनाव में उनके परिवार के लोगों के टिकट काटे गए और अब समाजवादी पार्टी के मंचों पर रामकिशुन यादव और उनके परिवार की बखिया उधेड़ी जा रही है। साथ ही साथ एक फोटो सार्वजनिक करके उनकी पोल खोलने के दावे किए जा रहे हैं। इससे लगता है कि सपा के अंदर दरार पड़ने लगी है।

आपको बता दें कि चंदौली जिला बनने के पहले रामकिशुन यादव के पिता गंजी प्रसाद समाजवादी पार्टी का झंडा बुलंद करते हुए एकीकृत वाराणसी जिले की कमान संभाली थी। तब वाराणसी जिला हुआ करता था। जिला भदोही से लेकर चंदौली तक एक था और वाराणसी के नाम से जाना जाता था।

इतना ही नहीं यह गौरव रामकिशुन यादव को भी हासिल है। लगभग वह एक दशक तक वह सपा के जिलाध्यक्ष रहे। संयुक्त रूप से वाराणसी जिले के साथ-साथ विभाजित चंदौली जिले के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया और पार्टी को खड़ा करने और बड़े से बड़े आंदोलन को भी अंजाम देने में बड़ी भूमिका निभायी थी। पर अब बदलते दौर में लग रहा है कि पार्टी के कुछ लोग इन्हें दरकिनार करने की फिराक में लगे हैं और ऐसा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि जैसे अब समाजवादी पार्टी को रामकिशुन यादव की जरूरत ही न हो।

जब इस संदर्भ में चंदौली समाचार ने रामकिशुन यादव से बात करने की कोशिश की गई तो उनका साफ साफ कहना था कि हम किसी व्यक्ति विशेष के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं। हमारी प्रतिबद्धता समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव के लिए है। जैसा समाजवादी पार्टी का निर्देश होगा और पार्टी मुखिया अखिलेश यादव निर्देशित करेंगे.. वैसा ही वह काम करेंगे। किसी छोटे-मोटे चुनाव में टिकट मिलने और कटने से उनकी राजनीतिक हैसियत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। आज भी वह समाजवादी पार्टी के प्रति उतने ही समर्पित हैं, जितने कि पार्टी के अन्य नेता दावा कर रहे हैं। समय का इंतजार करिए हर किसी को उनके सवालों का जवाब मिल जाएगा।

हालांकि इस मामले पर पार्टी के जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर से कई बार फोन मिलाकर बात करने की कोशिश की गयी, लेकिन उन्होंने फोन ही नहीं उठाया और न ही बात करने की पहल की।