कांसेप्ट फोटो

चंदौली जिले में समाजवादी पार्टी और बसपा के महागठबंधन के प्रत्याशी के घोषित ना होने से मतदाताओं में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। एक और जहां भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार और कार्यकर्ता अपनी जीत सुनिश्चित मानते हुए चुनावी तैयारी कर रहे हैं, तो वहीं भारतीय जनता पार्टी को समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी से वाकओवर जैसा मिलता नजर आ रहा है।

रामकिशुन व महेन्द्र नाथ पांडेय

चंदौली जिले में समाजवादी पार्टी के कई दावेदार उभर कर सामने तो आए, लेकिन बसपा से गठबंधन के बाद यहां के टिकट पर पेच फंस गया है। चंदौली जिले के आसपास की सभी सीटों पर समाजवादी पार्टी में अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं, लेकिन चंदौली जिले की सीट पर उम्मीदवार घोषित ना होने की वजह से सपा-बसपा कार्यकर्ताओं में जोश नहीं दिख रहा है।

इस सीट पर पूर्व सांसद रामकिशन यादव, सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू समाजवादी, पार्टी सरकार में मंत्री रहे गाजीपुर के वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश सिंह के साथ साथ तमाम नेताओं के नाम की यदा कदा चर्चा तो होती रहती है, लेकिन उम्मीदवार कौन बनेगा इस को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता भी चुप्पी साधे हुए हैं।

ओम प्रकाश सिंह

हालांकि समाजवादी पार्टी के दो तगड़े दावेदार रामकिशन यादव और मनोज सिंह डब्लू अपने अपने स्तर से चुनावी तैयारी कर रहे हैं और अपनी दावेदारी को सबसे ज्यादा मजबूत बता रहे हैं। पर यह दोनों नेता भी टिकट बंटवारे में देरी का कारण समझ नहीं पा रहे हैं। ये लोग भी हर किसी से अपना टिकट पक्का होने का दावा करते नजर आ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि समाजवादी पार्टी में टिकट किसी एक को मिलते ही पार्टी में फूट पड़ जाएगी या पार्टी के नेता एक दूसरे को हराने के टिकट में लग जाएंगे। इसलिए समाजवादी पार्टी का आला नेतृत्व जानबूझकर टिकट बंटवारे में देरी कर रहा हैं, ताकि किसी एक को टिकट देने पर दूसरे किसी दावेदार को पार्टी के विरोध में प्रचार करने का मौका ना मिल सके।

इसके अलावा  एक चर्चा  यह भी कहा जा रहा है कि इस सीट पर सपा बसपा के गठबंधन के अलावा कोई और बाहरी उम्मीदवार की इन दोनों दलों के द्वारा समर्थन दिया जा सकता है, जिससे कि महेंद्र नाथ पांडे के हाथ से यह सीट छीनी जा सके। हालांकि यह तस्वीर अगले आने वाले एक सप्ताह में साफ होती दिख रही है, लेकिन पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में दुविधा की स्थिति बनी हुई है।