घूंघट व बुर्का वाली महिला

चंदौली जिले में मतदान के दिन होने वाली किचकिच से बचने के लिए जिला प्रशासन रणनीति बना रहा है।  अक्सर अभिकर्ताओं का विरोध रहता है कि पर्दानशीं महिलाएं फर्जी मत देने आ गई हैं। इसी विरोध पर संबंधित पार्टी के अभिकर्ता मारपीट पर उतारू हो जाया करते हैं।

 

ऐसी हालत में मतदान केंद्र पर स्थिति गंभीर हो जाया करती है, लेकिन इस बार ऐसा किसी दल या अभिकर्ता को सवाल उठाने का मौका ही नहीं मिलेगा। पर्दानशीं महिला चाहे वह किसी भी जाति-धर्म की हों, उन्हें पीठासीन अधिकारी के समक्ष अपनी पहचान बतानी होगी। पहचान पत्र के हिसाब से चेहरा भी  दिखाना होगा ताकि उसका मिलान किया जा सके, तभी वह पर्दानशीं महिला वोट डाल पाएंगी।

 

पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा व लोकसभा के चुनावों में अक्सर पर्दानशीनों को लेकर मतदान केंद्रों पर असमंजस की स्थिति हो जाती है। कहीं-कहीं तो नौबत ऐसी आ जाती है कि अभिकर्ता और गांव के लोग आपस में भिड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में मतदान कर्मी भी कोई निर्णय नहीं ले पाते। ज्यादातर केंद्रों पर ऐसी पर्दानशीनों का सही मतदान होता है लेकिन कुछ केंद्रों पर ऐसी मतदाता फर्जी निकल आती हैं। इससे हर केंद्र पर सवाल उठता रहता है।

 

चंदौली जिले में मुगलसराय, सैयदराजा, सकलडीहा और चकिया चारों ही स्थानों पर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में पर्दानशीन महिला मत डालने आती हैं। चेहरा ढका रहने के कारण अभिकर्ता संशय में रहते हैं कि कहीं फर्जी मतदान तो नहीं होने जा रहा। कोई संशय न रहे इसके लिए चुनाव आयोग ने मतदान के दिन कम से कम अभिकर्ता या पीठासीन अधिकारी के समक्ष पर्दा की मान्यता को दरकिनार करने का निर्देश दिया है। कहा पीठासीन अधिकारी मतदाता पहचान पत्र से चेहरे का मिलान कर मत दिलवाएं, इसमें लापरवाही न करें।